Prayagraj: यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश आने तक शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
Prayagraj: अदालत ने दो महत्वपूर्ण निर्देश दिए
- फैसला आने तक गिरफ्तारी नहीं होगी।
- शंकराचार्य जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
मामले में शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन. मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से अधिवक्ता रीना सिंह ने भी दलीलें पेश कीं। अब इस मामले (Prayagraj) की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है।
अग्रिम जमानत की अर्जी
शंकराचार्य ने 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उनके मठ में समर्थकों के बीच राहत और उत्साह का माहौल देखा गया।
मामले की शुरुआत तब हुई जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत जिला अदालत (Prayagraj) में याचिका दायर की। इसके बाद प्रयागराज की स्पेशल (रेप एवं पोक्सो) कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर झूंसी थाने में शंकराचार्य के खिलाफ बटुकों से कथित कुकर्म के आरोप में FIR दर्ज की गई।
सुनवाई (Prayagraj) के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि शंकराचार्य प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनकी गिरफ्तारी न होने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग को तैयार हैं।

