Varanasi: आदिशक्ति की आराधना, उपासना और साधना का महापर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रातःकाल घटस्थापना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा। इस बार चैत्र नवरात्रि पुरे नौ दिनों की होगी यानि कि 27 मार्च को रामनवमी के दिन इसका समापन होगा। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।

Varanasi: BHU के प्रो. ने दी जानकारी
नवरात्रि के पहले दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाएगी, जिसके साथ ही व्रत और पूजन का क्रम शुरू हो जाएगा। इस नौ दिनों तक चलने वाले महापर्व से संबंधित विविध जानकारी काशी हिंदू विश्वविद्यालय (Varanasi) के संस्कृत विद्याधर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर विनय कुमार पांडे ने दी।

प्रोफेसर विनय कुमार पांडे के अनुसार नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में भक्तों को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए, ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

प्रो. विनय कुमार पांडे के अनुसार, नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन मां दुर्गा (Varanasi) के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी मंत्रों का जाप और विशेष अनुष्ठान करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के अंतिम चरण में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि का पर्व केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण पर्व है। इन दिनों लोग सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर उत्सव का आनंद लेते हैं और आध्यात्मिक वातावरण (Varanasi) में मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहते हैं।

