Badrinath Dham: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम वैशाख शुक्ल सप्तमी के शुभ अवसर पर तय मुहूर्त के अनुसार सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के कपाट खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच यह प्रक्रिया संपन्न हुई। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में द्वार पूजा को सम्पन्न किया गया। कपाट (Badrinath Dham) खुलते ही मौके पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने जय बद्री विशाल और लक्ष्मी माता के जयकारे लगाये।

आपको बता दें कि कपाट (Badrinath Dham) खुलने से पहले द्वार पूजन, पंचांग पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इसके बाद नर पूजा की परंपरा निभाई गई, जिसकी जिम्मेदारी रावल ने संभाली। कपाट (Badrinath Dham) खुलने के साथ ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से पहुंचे श्रद्धालु भी इस पावन क्षण के साक्षी बने। दर्शन के लिए सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।

Badrinath Dham: श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष भी मौके पर मौजूद रहे। बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि कपाट खुलने के बाद अगले छह माह तक सनातन धर्मावलंबी भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है।

मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। रंग-बिरंगे पुष्पों से सजे धाम की छटा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही। कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा ने भी पूरी गति पकड़ ली है।


