Sonbhadra: राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के भेलाही बांध के समीप शनिवार को वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीनों घनिष्ठ मित्रों का शनिवार शाम ससनई घाट पर एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम (Sonbhadra) के बाद शाम करीब चार बजे जैसे ही तीनों युवकों के शव ससनई गांव पहुंचे, पूरे गांव में कोहराम मच गया। हर ओर चीख-पुकार और मातम का माहौल था। परिजनों के विलाप से माहौल गमगीन हो उठा और गांव की आंखें नम हो गईं। सोन नदी के किनारे स्थित ससनई घाट पर जब एक साथ तीन चिताएं जलीं तो यह दृश्य देख हर किसी का कलेजा कांप उठा। पूरा गांव शोक में डूब गया।

रिश्तेदार और ग्रामीण (Sonbhadra) परिजनों को ढांढस बंधाने में जुटे रहे, लेकिन अपनों को खोने का दर्द किसी के शब्दों से कम नहीं हो सका। हादसे में मृत जितेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था। उनके पिता चंडीगढ़ में काम करते हैं, इसलिए अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में उनके चाचा ने मुखाग्नि दी। जितेंद्र की पत्नी गर्भवती हैं। पति की मौत के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं, दूसरे मृतक दिलीप पासवान को उनके पिता प्रमोद पासवान ने मुखाग्नि दी।
Sonbhadra: घर में पसरा मातम
कृषि कार्य से परिवार का भरण-पोषण करने वाले इस परिवार में दिलीप सबसे बड़े बेटे थे और परचून (Sonbhadra) की दुकान संभालते थे। पीछे उनकी ढाई वर्ष और एक वर्ष की दो मासूम बेटियां हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया। घर में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।तीसरे मृतक नीतीश कुमार यादव का अंतिम संस्कार उनके पिता लालमणि यादव ने किया। घर पर रहकर वाहन चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले नीतीश अपने भाइयों में बड़े थे। उनके पीछे एक साल का मासूम बेटा है, जो अब पिता के स्नेह से वंचित हो गया।बताया जा रहा है कि हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवक आपस में घनिष्ठ मित्र थे।
शुक्रवार रात वे अपने एक दोस्त की शादी में शामिल होने रायपुर क्षेत्र के पवनी गांव बारात लेकर गए थे। खुशी के उस सफर का अंत इतनी दर्दनाक त्रासदी में होगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक साथ तीन दोस्तों की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। इधर, अंतिम संस्कार में किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक (Sonbhadra) अधिकारी के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली। मृतक दिलीप पासवान के भाई संदीप कुमार पासवान ने कहा कि जिस गांव में एक साथ तीन युवकों की चिताएं जल रही हों, वहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीनता को दर्शाने वाली है।
एक साथ उठीं तीन अर्थियों और जलीं तीन चिताओं ने ससनई गांव को ऐसी पीड़ा दी है, जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा। गांव में हर चेहरा मायूस है और हर आंख इस दर्दनाक हादसे को याद कर नम हो उठती है।

