• About
  • Advertise
  • EPaper
Thursday, June 25, 2026
No Result
View All Result
Hindi News,Breaking News, Latest News, Political News
E-PAPER
english news
  • होम
  • देश-विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • वाराणसी
      • प्रयागराज
      • अयोध्या
      • लखनऊ
      • गोरखपुर
      • कानपुर
      • आजमगढ़
      • गाजीपुर
      • चंदौली
      • जौनपुर
      • बलिया
      • भदोही
      • मऊ
      • मिर्जापुर
      • सोनभद्र
  • राजनीति
  • एंटरटेनमेंट
    • बॉलीवुड
    • हॉलीवुड
    • टॉलीवुड
    • भोजपुरी
    • टीवी
    • वेब सीरीज
    • मूवी रिव्यु
  • धर्म कर्म
  • बिज़नेस
  • हेल्थ
  • खेल
  • साइंस
    • टेक्नोलॉजी
    • ऑटोमोबाइल
  • लाइफस्टाइल
    • फैशन
    • स्वास्थ्य
    • ट्रैवेल
    • खान-पान
  • एजुकेशन
  • अजब गजब
  • स्पेशल स्टोरी
  • Web Story
  • होम
  • देश-विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • वाराणसी
      • प्रयागराज
      • अयोध्या
      • लखनऊ
      • गोरखपुर
      • कानपुर
      • आजमगढ़
      • गाजीपुर
      • चंदौली
      • जौनपुर
      • बलिया
      • भदोही
      • मऊ
      • मिर्जापुर
      • सोनभद्र
  • राजनीति
  • एंटरटेनमेंट
    • बॉलीवुड
    • हॉलीवुड
    • टॉलीवुड
    • भोजपुरी
    • टीवी
    • वेब सीरीज
    • मूवी रिव्यु
  • धर्म कर्म
  • बिज़नेस
  • हेल्थ
  • खेल
  • साइंस
    • टेक्नोलॉजी
    • ऑटोमोबाइल
  • लाइफस्टाइल
    • फैशन
    • स्वास्थ्य
    • ट्रैवेल
    • खान-पान
  • एजुकेशन
  • अजब गजब
  • स्पेशल स्टोरी
  • Web Story
No Result
View All Result
Hindi News,Breaking News, Latest News, Political News
No Result
View All Result
Home राजनीति

2027 की जंग से पहले बदले-बदले दिख रहे Akhilesh Yadav, ‘एम-वाई’ से आगे बढ़कर अब मंदिर, ब्राह्मण और नए सामाजिक समीकरणों पर दांव

by jstimesen
May 11, 2026
in राजनीति
0
akhilesh yadav
0
SHARES
6
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया Akhilesh Yadav की बदलती राजनीतिक शैली को लेकर है। लंबे समय तक मुस्लिम-यादव समीकरण की राजनीति करने वाली सपा अब खुद को नए रंग-रूप में पेश करती दिखाई दे रही है। इटावा में केदारेश्वर मंदिर निर्माण से लेकर ज्योतिष और पंडितों की सलाह पर राजनीति करने तक, अखिलेश एक ऐसी छवि गढ़ने में जुटे हैं जो उन्हें केवल मुस्लिमों या यादवों के नेता की बजाय “सर्वसमाज” के चेहरे के रूप में स्थापित कर सके।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि 2027 के चुनाव में सपा मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या भी कम कर सकती है। यह बदलाव अचानक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के हिंदुत्व नैरेटिव का जवाब और बदलती चुनावी जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विरासत में मिली ‘एम-वाई’ राजनीति की पहचान

समाजवादी पार्टी (Akhilesh Yadav) की राजनीतिक पहचान लंबे समय तक मुस्लिम-यादव समीकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही। इसकी नींव उस दौर में मजबूत हुई जब 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना के बाद भाजपा ने मुलायम सिंह यादव को “मुल्ला मुलायम” कहना शुरू किया। इसके बाद सपा की छवि मुस्लिम हितैषी दल के रूप में स्थापित होती चली गई। जब अखिलेश यादव ने पार्टी की कमान संभाली तो उन्हें इसी सामाजिक समीकरण का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना गया। पार्टी का सबसे बड़ा आधार मुस्लिम और यादव वोटर्स को ही समझा गया और सपा ने वर्षों तक इसी फॉर्मूले पर अपनी राजनीति खड़ी रखी।

मुजफ्फरनगर दंगों ने और गहरी की धारणा

साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे सपा सरकार की राजनीति पर बड़ा असर छोड़ गए। उस वक्त अखिलेश (Akhilesh Yadav) मुख्यमंत्री थे और उनकी सरकार ने दंगा प्रभावित मुस्लिम परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा देने की अधिसूचना जारी की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा। भाजपा ने उस दौर में लगातार आरोप लगाए कि सपा सरकार खास समुदाय के प्रति नरम रुख अपना रही है। मार्च 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि सरकार हिंसा रोकने में काफी हद तक विफल रही थी। इसके बाद हिंदू वोटर्स के बीच यह धारणा और मजबूत हुई कि सपा की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।

अब मंदिर के जरिए नया संदेश देने की तैयारी- Akhilesh Yadav

अब वही अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) खुद को एक नए राजनीतिक फ्रेम में ढालते दिखाई दे रहे हैं। इटावा में उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर “श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर” का निर्माण इसी बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस मंदिर के मुख्य ट्रस्टी खुद अखिलेश यादव हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर का निर्माण “शिवशक्ति अक्ष रेखा” पर किया जा रहा है, जिससे इसकी धार्मिक अहमियत और बढ़ जाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में इस मंदिर के उद्घाटन की योजना के जरिए सपा भाजपा के उस नैरेटिव को तोड़ना चाहती है जिसमें उसे हिंदू विरोधी दल के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। हालांकि, यह भी दिलचस्प है कि अखिलेश अब तक अयोध्या के राममंदिर और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि जैसे बड़े धार्मिक केंद्रों से दूरी बनाए रखते आए हैं। फिर भी महाकुंभ में गंगा स्नान और अब केदारेश्वर मंदिर निर्माण जैसे कदम उनकी नई रणनीति की तरफ इशारा कर रहे हैं।

‘पंडितजी’ की सलाह पर राजनीति का नया अध्याय

6 मई को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने जब यह कहा कि अब वे हर कदम “पंडित जी” की सलाह पर उठा रहे हैं, तो इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने दावा किया कि 2012 में भी ज्योतिष और पंडितों के मार्गदर्शन में उनकी सरकार बनी थी और अब वे फिर उसी राह पर चल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अब उनके घर से निकलने का समय, पहनावे का रंग और चुनाव प्रचार की शुरुआत तक ज्योतिषीय सलाह के अनुसार तय की जा रही है।

इसे केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज को संदेश देने वाली राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सपा (Akhilesh Yadav) अब शंकराचार्य और ब्राह्मण सम्मान जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाने लगी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश हो रही है कि पार्टी केवल पिछड़ों और मुस्लिमों की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती।

‘पीडीए’ से आगे बढ़कर सवर्ण समीकरण साधने की कोशिश

2022 विधानसभा चुनाव तक सपा का मुख्य फोकस मुस्लिम-यादव समीकरण ही रहा, लेकिन पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने “पीडीए” यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का नया नारा दिया। इस रणनीति के तहत यादव और मुस्लिम उम्मीदवारों (Akhilesh Yadav) की संख्या कम रखते हुए अन्य पिछड़ी जातियों और दलित चेहरों को ज्यादा महत्व दिया गया। यह प्रयोग काफी हद तक सफल रहा और भाजपा को उत्तर प्रदेश में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

सपा राज्य (Akhilesh Yadav) में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब माना जा रहा है कि 2027 में इसी फार्मूले का विस्तार किया जाएगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि इस बार सपा सवर्ण जातियों, खासकर ब्राह्मणों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। मंदिर, सनातन और ज्योतिष जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या घटाने की चर्चा क्यों?

सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 2027 विधानसभा चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या कम की जा सकती है। 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 62 प्रत्याशियों में केवल 4 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। अब यही मॉडल विधानसभा चुनाव में भी अपनाने की चर्चा है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार उतारने से भाजपा को ध्रुवीकरण का मौका मिल जाता है।

इसलिए सपा अब ऐसा संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है जिसमें मुस्लिम वोट भी बने रहें और हिंदू वोटर्स में भय या दूरी की भावना भी कम हो। हालांकि, यह रणनीति जोखिम से खाली नहीं है। अगर मुस्लिम समुदाय (Akhilesh Yadav) को यह महसूस हुआ कि पार्टी उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे रही, तो वोटों का बिखराव संभव है।

ओवैसी और मायावती बन सकते हैं नई रणनीति की चुनौती

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर सपा मुस्लिम नेतृत्व और टिकट वितरण में कटौती करती है, तो असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और मायावती की बसपा इस खाली जगह को भरने की कोशिश करेंगी। ओवैसी पहले भी बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में विपक्षी वोटों में सेंध लगाते रहे हैं। अगर मुस्लिम वोटों (Akhilesh Yadav) का बंटवारा हुआ, तो उसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही वजह है कि अखिलेश की नई रणनीति जितनी महत्वाकांक्षी दिखती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी मानी जा रही है।

भाजपा की नई घेराबंदी और सपा का जवाब

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। “400 पार” और संविधान बदलने जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने भाजपा को घेरा और उसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई दिया। अब भाजपा बूथ स्तर पर ज्यादा आक्रामक तैयारी में जुटी है। ऐसे में सपा (Akhilesh Yadav) भी केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी अब भाजपा के एजेंडे का जवाब उसी की शैली में देने की कोशिश कर रही है।

फर्क सिर्फ इतना है कि अखिलेश (Akhilesh Yadav) हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति की बजाय “सॉफ्ट हिंदुत्व” का रास्ता चुनते दिखाई दे रहे हैं। मायावती के कमजोर पड़ते जनाधार के बीच अखिलेश खुद को भाजपा के सबसे मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं। मंदिर निर्माण, ब्राह्मणों को साधने की कोशिश, ज्योतिषीय प्रतीकों का इस्तेमाल और टिकट वितरण में बदलाव इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

also read

उत्तर प्रदेश की राजनीति तेजी से बदल रही है। जातीय समीकरणों के साथ अब धार्मिक प्रतीकों और सामाजिक संदेशों की अहमियत भी बढ़ गई है। ऐसे में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का यह नया राजनीतिक प्रयोग केवल छवि बदलने की कोशिश नहीं, बल्कि सत्ता में वापसी का बड़ा दांव माना जा रहा है।

Related Posts:

  • NDA-SBSP: जातीय समीकरण में फंसेगा भाजपा-सुभासपा…
  • UP Election 2027: पूर्वांचल में बढ़ी अतुल राय की…
  • Ghosi Election Analysis: बीजेपी के वोट बैंक में…
  • Mission-2024: पूर्वांचल में फिर से खाता खोलने को सपा…
  • Rana Sanga Controversy: राणा सांगा पर टिप्पणी से सपा…
  • India : जानिए भारत का नाम "भारत" कैसे पड़ा और कैसी…
Previous Post

Varanasi: मई के शुरुआती दिनों में घटी बिजली खपत, मौसम में बदलाव से उपभोक्ताओं को मिली राहत

Next Post

Varanasi: ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में राज्यपाल संग शामिल हुए सीएम योगी, काशी विश्वनाथ धाम में किया दर्शन-पूजन

Next Post
varanasi

Varanasi: ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में राज्यपाल संग शामिल हुए सीएम योगी, काशी विश्वनाथ धाम में किया दर्शन-पूजन

Web Stories

10 Things to know about The Kerala Story
Rashifal: 21 अप्रैल से वृहस्पति बदलेंगे अपनी चाल, राशियों पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव
ब्लैक साड़ी में खुबसूरत दिखीं South Actress Keerthy Suresh
गोल्डन लहंगे में दुल्हन बनीं एक्ट्रेस Mrunal Thakur
बदलने वाली है ग्रहों की चाल, राशियों पर पड़ेगा ये प्रभाव

Recent Posts

  • अब BJP के काशी क्षेत्र की कमान अशोक चौरसिया को, सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले, देखें पूरी लिस्ट
  • Sonbhadra: गुरमुरा में दर्दनाक सड़क हादसा, खड़े वाहन में घुसी डीजे मैजिक, दो युवकों की मौत, तीन घायल
  • 17 वैश्विक शहरों से जुड़ा वाराणसी, भारत की पहली ‘हब एंड स्पोक’ आधारित विमान सेवा “Easy Connect” का शुभारंभ
  • Sonbhadra: सांकेतिक बोर्ड से टकराई बाइक, तारा चंडी मंदिर के पास दर्दनाक हादसा, युवक की मौत, एक गंभीर घायल
  • Varanasi: मोहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, नई परंपरा और नए रूट पर रोक, पुलिस कमिश्नर-डीएम ने किया संयुक्त निरीक्षण
  • Mau: पुलिस मुठभेड़ में तेल चोरी गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार, एक घायल, ट्रक चालक को गोली मारने की घटना का खुलासा
  • 35 कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी सील, 20 को नोटिस, Varanasi में वीडीए का बड़ा अभियान
  • Sonbhadra: सोन नदी में डूबे तीन किशोर, तलाश जारी, मंत्री संजीव गोंड ने परिजनों को बंधाया ढांढस
  • Sonbhadra: ससुराल में दंपती की संदिग्ध मौत से सनसनी, पति फंदे पर लटका मिला, पत्नी चारपाई पर मृत
  • Mau: भाई को बचाने में नदी में समाईं दो बहनें, एकादशी पर सरयू स्नान बना मातम, तलाश जारी

Categories

About Us

Jansandesh Times

Category

  • अजब गजब
  • अपराध
  • अयोध्या
  • आजमगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • एजुकेशन
  • एंटरटेनमेंट
  • ऑटोमोबाइल
  • कानपुर
  • खान-पान
  • खेल
  • गाजीपुर
  • गोरखपुर
  • चंदौली
  • जौनपुर
  • टीवी
  • टेक्नोलॉजी
  • टॉलीवुड
  • ट्रैवेल
  • दिल्ली
  • देश-विदेश
  • धर्म कर्म
  • प्रयागराज
  • फैशन
  • फ़ोटो गैलरी
  • बलिया
  • बिज़नेस
  • बॉलीवुड
  • भदोही
  • भोजपुरी
  • मऊ
  • मिर्जापुर
  • मूवी रिव्यु
  • राजनीति
  • राज्य
  • लखनऊ
  • लाइफस्टाइल
  • वाराणसी
  • वेब सीरीज
  • साइंस
  • सोनभद्र
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • हेल्थ
  • हॉलीवुड

Recent Posts

  • अब BJP के काशी क्षेत्र की कमान अशोक चौरसिया को, सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले, देखें पूरी लिस्ट
  • Sonbhadra: गुरमुरा में दर्दनाक सड़क हादसा, खड़े वाहन में घुसी डीजे मैजिक, दो युवकों की मौत, तीन घायल
  • 17 वैश्विक शहरों से जुड़ा वाराणसी, भारत की पहली ‘हब एंड स्पोक’ आधारित विमान सेवा “Easy Connect” का शुभारंभ
  • Sonbhadra: सांकेतिक बोर्ड से टकराई बाइक, तारा चंडी मंदिर के पास दर्दनाक हादसा, युवक की मौत, एक गंभीर घायल
  • Varanasi: मोहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, नई परंपरा और नए रूट पर रोक, पुलिस कमिश्नर-डीएम ने किया संयुक्त निरीक्षण
  • About
  • Advertise
  • EPaper

© 2022 Jansandesh Times

No Result
View All Result
  • होम
  • देश-विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • वाराणसी
      • प्रयागराज
      • अयोध्या
      • लखनऊ
      • कानपुर
      • गोरखपुर
  • राजनीति
  • एंटरटेनमेंट
    • हॉलीवुड
    • बॉलीवुड
    • टॉलीवुड
    • टीवी
    • भोजपुरी
    • वेब सीरीज
    • मूवी रिव्यु
  • धर्म कर्म
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • हेल्थ
  • खेल
  • साइंस
    • टेक्नोलॉजी
    • ऑटोमोबाइल
  • लाइफस्टाइल
    • फैशन
    • स्वास्थ्य
    • ट्रैवेल
    • खान-पान
  • एजुकेशन
  • अजब गजब
  • स्पेशल स्टोरी
  • Web Story
  • E-Paper
  • English News

© 2022 Jansandesh Times

10 Things to know about The Kerala Story Rashifal: 21 अप्रैल से वृहस्पति बदलेंगे अपनी चाल, राशियों पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव ब्लैक साड़ी में खुबसूरत दिखीं South Actress Keerthy Suresh गोल्डन लहंगे में दुल्हन बनीं एक्ट्रेस Mrunal Thakur बदलने वाली है ग्रहों की चाल, राशियों पर पड़ेगा ये प्रभाव