जानते हैं, कि मिट्टी के बर्तन या घड़े का पानी नैचुरल अल्कलाइन वॉटर होता है। इसके अलावा, भी पानी को अलग-अलग जरूरतों के अनुसार विभिन्न धातुओं से बने बर्तनों में स्टोर किया जाता है, खासकर मौसम में परिवर्तन के अनुसार। इस तरह पानी को न सिर्फ शुद्ध करने में मदद मिलती थी, बल्कि इसके गुण भी बढ़ जाते थे। लेकिन आजकल हम देखते हैं, कि हम में से ज्यादातर लोग प्लास्टिक की बोतल और बर्तनों में पानी को स्टोर करके रखते हैं। जबकि यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार इन बर्तनों में स्टोर करना चाहिए पानी-
1.स्टी ल की बोतलें
स्टी.ल की बोतलें बाजार में काफी आसानी से उपलब्ध हैं।ये टिकाउ भी होते हैं और सस्तेब भी।इनमें घंटों रखा पानी भी सेहत को नुकसान नहीं पहुचाता है और इसे आप कहीं भी आसानी से कैरी कर सकते हैं।
2.तांबे के बर्तन
तांबे के बर्तन में स्टोर पानी की तासीर गर्म और स्वाद मीठा होता है। यह शरीर के भीतर तापमान को बढ़ाता है। यह एनीमिया से पीड़ित रोगियों के लिए लाभकारी है, क्योंकि तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है। सर्दियों और ठंडे मौसम में इस पानी का सेवन आदर्श माना जाता है।
3.मिट्टा का घड़ा
घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और मीठा होता है। यह शरीर की गर्मी को संतुलित रखने में मदद करता है। इसलिए गर्मियों में घड़े का पानी पीने की सलाह दी जाती है। इस दौरान आप फ्रिज में रखे पानी की बजाए, घड़े का पानी से आपको ठंडक मिलेगी।
4.बांस की बोतलें
हालांकि ये बोतलें दुकानों में आसानी से उपलब्धा नहीं होतीं लेकिन अगर आप थोड़ा सा सर्च करें तो इन्हेंल आप खरीद सकते हैं। इस बोतल में पानी पीने से सेहत को भी काफी फायदा मिलता है।दरअसल बांस में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं और बांस के अर्क से बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में उपयोग किया जाता है।इसके अलावा भी इसमें कई ऐसे गुण हैं जो आपकी सेहत को ठीक रखने में मदद कर सकता है।यही नहीं, ये पर्यावरण के लिए भी बुरा नहीं है।
Anupama Dubey