SIR को लेकर देश में चर्चाएँ काफी ज्यादा हो गयी है। ECI ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की कार्य प्रणाली चलाई जिसके तहत मतदाताओं की मैपिंग किया जा रहा है। साथ ही इसे तीन चरण में चलाया जायेगा। इसी दौरान बीच भारत सरकार द्वारा पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर तथा काशी विश्वनाथ मंदिर के आचार्य महामहोपाध्याय पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी एक बार पुनः प्रशासनिक–नागरिक समन्वय के सशक्त केंद्र के रूप में सामने आए।
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का उनके आवास पर विशेष रूप से पहुँचना केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं था, बल्कि यह प्रो. द्विवेदी के सामाजिक, बौद्धिक एवं राष्ट्रीय योगदान के प्रति प्रशासनिक सम्मान का प्रतीक भी था।
SIR को लेकर विस्तार से जानकारी
इस अवसर पर SIR (स्टेटस इन्फॉर्मेशन रजिस्ट्रेशन) को लेकर गहन, सार्थक एवं विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी महोदय ने प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी एवं उपस्थित पारिवारिक सदस्यों को SIR फॉर्म के उद्देश्य, आवश्यकता, प्रशासनिक महत्व तथा दीर्घकालिक उपयोगिता के विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
SIR है नागरिक की पहचान
अपने विचार व्यक्त करते हुए पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि SIR जैसे दस्तावेज़ लोकतंत्र की जड़ों को सुदृढ़ करने वाले आधारभूत स्तंभ हैं। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मठता का प्रतिफल बताया। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि SIR नागरिक पहचान की मजबूती, प्रशासनिक जवाबदेही और जनविश्वास को बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब नागरिक सही और प्रमाणिक जानकारी के साथ प्रशासन से जुड़ते हैं, तभी सुशासन की अवधारणा वास्तविक धरातल पर साकार होती है। उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य पर बल दिया कि नागरिक कर्तव्य और प्रशासनिक सहयोग एक-दूसरे के पूरक हैं। SIR के माध्यम से आमजन की सक्रिय भागीदारी न केवल सरकारी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाती है, बल्कि शासन और समाज के बीच विश्वास को भी और अधिक सुदृढ़ करती है।
प्रो. द्विवेदी ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे SIR फॉर्म को गंभीरता से भरें और राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें। यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा कि जिलाधिकारी का स्वयं प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी के आवास पर पहुँचकर इस विषय पर चर्चा करना, उनके प्रति प्रशासनिक (SIR) सम्मान और समाज में उनकी विशिष्ट भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह पहल एक ओर प्रशासन की जनोन्मुखी सोच को प्रतिबिंबित करती है, वहीं दूसरी ओर प्रो. द्विवेदी की उस निरंतर प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है, जिसके माध्यम से वे दशकों से समाज को जागरूक, अनुशासित और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग बनाते आ रहे हैं।
निस्संदेह, यह आयोजन पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी के व्यक्तित्व, विचार और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा को रेखांकित करने वाला एक प्रेरणादायी एवं स्मरणीय प्रसंग बन गया।

