Varanasi में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों पर अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने के आरोप एक बार फिर सामने आए हैं। शहर के कई अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन और कुछ दुकानदारों (Varanasi) के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा है कि किताबों और कॉपियों के नाम पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इसी बीच बुधवार को समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल जिला मुख्यालय पर पहुँचा। जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्याओं और मांगों का एक ज्ञापन एडीएम सिटी अलोक कुमार वर्मा को सौंपा।

वहीं प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि निजी स्कूल (Varanasi) संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से हर वर्ष फीस में वृद्धि करने के साथ-साथ एडमिशन शुल्क, ड्रेस, किताब-कॉपी और अन्य सामग्री के नाम पर भारी रकम वसूल रहे हैं। जिसके कारण अभिभावकों को भारी आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रह है। पैसे की तंगी के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों का स्कूल में नामांकन भी नही करा पा रहे हैं।

कुछ अभिभावकों (Varanasi) ने शिकायत करते हुए कहा कि कई निजी विद्यालय निर्धारित दुकानों से ही कापी, किताब, ड्रेस, बेल्ट और टाई खरीदने के लिए बाध्य करते हैं और उन दुकानों पर बाजार से अधिक कीमत वसूली जाती है। जिसके कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

Varanasi: पढ़ाई के नाम पर आर्थिक शोषण
समाजवादी पार्टी के लोहिया वाहिनी (Varanasi) के प्रदेश महासचिव दीपचंद गुप्ता ने कहा कि निजी स्कूलों में इस तरह के चल रही मनमानी पर रोक लगाई जाये। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों के संचालकों का दुकानदारों से तालमेल होता है। जिसके बाद वो अभिभावकों को चिन्हित दुकानों पर ही भेजते हैं ताकि उनका कमीशन बनते रहे हैं। महासचिव दीपचंद ने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रवृत्ति अब एक व्यवसाय का रूप ले चुकी है, जहां बच्चों की पढ़ाई के नाम पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।

वहीं उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सरकारी स्कूलों में ऐसी व्यवस्थाएं कि जाए जहाँ निचलावर्ग, मध्यमवर्ग समेत सभी वर्गों के बच्चे पढ़े।
बताते चलें कि कुछ अभिभावकों (Varanasi) का कहना है कि हर वर्ष अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाता है, जिससे पिछले साल की किताबें अनुपयोगी हो जाती हैं और अभिभावक नई किताबें खरीदने को मजबूर हो जाता है। इतना ही नहीं, मेधावी छात्र-छात्राओं को भी अगली कक्षा में प्रोन्नत होने के बावजूद पुनः एडमिशन शुल्क के नाम पर फीस देनी पड़ती है, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।



