Varanasi: काशी के अर्धचंद्राकार गंगा घाटों पर रविवार को रेत उस समय जीवंत हो उठी, जब देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 300 कलाकारों ने 42 टीमों में बंटकर 48 से अधिक रेत की आकृतियां उकेरीं। इस सैंड आर्ट आयोजन में कलाकारों ने समसामयिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और सांस्कृतिक विरासत को रेत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

varanasi:समाज को जागरूक करने का संदेश
रेत की आकृति खोज कार्यक्रम के माध्यम से कलाकारों ने विकास से विरासत तक और सेव अरावली जैसी महत्वपूर्ण थीम पर अपनी रचनात्मकता दिखाई। कलाकारों (varanasi) का उद्देश्य केवल कला प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का संदेश देना भी रहा। इस दौरान रेत पर टीम इंडिया की वर्ल्ड कप जीत की बधाई के साथ-साथ अहमदाबाद प्लेन क्रैश में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि भी दी गई। वहीं देश में चलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दर्शाती आकृति ने दर्शकों (varanasi) को खास प्रभावित किया।

युवाओं और बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत को लेकर भी कलाकारों ने चिंता जताई। “स्क्रीन टाइम छोड़ो, ग्रीन टाइम अपनाओ” के संदेश के साथ बच्चों द्वारा बनाई गई रेत की आकृति लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रही।


शिव की काशी (varanasi) में तिब्बती छात्रों द्वारा बनाई गई महाकाल के रौद्र स्वरूप की सैंड आर्ट ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में वाराणसी (varanasi) के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अन्य जिलों से आए कलाकारों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

