Azamgarh जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र के मिल्लतनगर से एक गंभीर मामला सामने आया है। ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बावजूद भारत में वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ लेने के आरोपों को लेकर जांच तेज हो गई है। बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मदरसा (Azamgarh ) शिक्षक शमसुल हुदा खान के अस्थायी आवास पर छापेमारी की कार्रवाई की।
आरोप है कि ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने भारत में वेतन और रिटायरमेंट लाभ लिया। हालांकि, अभी तक ईडी अधिकारियों की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक संतकबीरनगर (Azamgarh ) निवासी शमसुल हुदा खान की नियुक्ति 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ स्थित ‘दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम’ में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2007 में वह ब्रिटेन चले गए और 2013 में वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली। आरोप है कि ब्रिटिश नागरिक बनने के बाद भी उन्होंने 31 जुलाई 2017 तक भारत स्थित मदरसे से वेतन प्राप्त किया।
मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर चिकित्सा अवकाश स्वीकृत किया जाता रहा और करीब 16 लाख रुपये वेतन के रूप में दिए गए। वर्ष 2017 में उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी प्रदान कर दी गई थी। मामला सामने आने के बाद शासन ने संबंधित मदरसे (Azamgarh ) की मान्यता निरस्त कर दी थी।
Azamgarh: अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस प्रकरण में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकेत सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित किया जा चुका है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने आजमगढ़ (Azamgarh ) में तैनाती के दौरान कथित रूप से लाभ पहुंचाने में भूमिका निभाई।
फिलहाल मुबारकपुर (Azamgarh ) स्थित अस्थायी आवास पर ईडी की कार्रवाई जारी है। पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं और आगे की जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
