- भारत ने संस्कृति को जीवन से जोड़ा है
- हम पुराना कपड़ा पहन कर होली खेलेंगे
- कलर फेस्टिवल सेलिब्रेट करने को जर्मनी से आये बेंजामिन
राधेश्याम कमल
वाराणसी। ‘बनारस एकमात्र ऐसा शहर है जहां पर हम सब एक हैं। यह नारा यहां पर चरितार्थ होता हुआ दिखता है। काशी सत्य की नगरी है। देखा जाय तो बनारस ही पूरी तरह से इंडिया है। जब हम मणिकर्णिकाघाट पर शव का अंतिम संस्कार करते हुए देखते हैं तो उनसे हमारी आत्मीयता जुड़ जाती है। उसी में हम विलीन हो जाते हैं।’
यह कहना है जर्मनी से आये बेंजामिन पूटर का, जो कलर फेस्टिवल सेलिब्रेट करने के लिए अपनी बड़ी बहन एमली के साथ बनारस आये हैं। इस दौरान उनसे बातचीत हुई। कहा कि बनारस की होली बहुत ही खास होती है। हम होली पर यहां पुराना कपड़ा पहन कर होली खेलेंगे। भारत एक ऐसा देश है जहां पर कपड़ा भी कलरफुल पहनते हैं। मकान भी कलरफुल है। यह देश कलर से भरा हुआ है। हमें खुशी है कि भारत एक एशाा देश है जहां पर अपनी संस्कृति के साथ-साथ पूरी दुनिया को जोड़ कर रखता है। यह बहुत बड़ी महानता है, जो भारत आज भी संस्कृति को जीवनशैली से जोड़ा है। कहा कि हम भगवान शिव व पार्वती के विवाह पर काशीवासियों को बधाई व शुभकामना देते हैं।

बेंजामिन पूटर ने कई किताबें भी लिखी हैं जिसमें व्हाट गांधी मीन्स टू मी तथा चाइल्ड लेबर पुस्तक हैं। इस पुस्तक में उन्होंने गांधी क्या है के बारे में लिखा है। उनके मुताबिक गांधीजी की जो जो सोच है वह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। बेंजामिन पूटर व उनकी बहन एमली का काशी के प्रसिद्ध सरोदवादक पं. विकास महराज के साथ बरसों पुराना संबंध है। वे बताते हैं कि बनारस घराने के संगीतज्ञ पं. विकास महराज का जर्मनी समेत कई देशों में ख्याति है। भारतीय शास्त्रीय संगीत यूनिवर्सल है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की कोई सीमा नहीं है। पं. विकास महराज सरोद बजाते हैं। यह अफगानिस्तान से आया है लेकिन इन्होंने जो उंचाई दी है वह हमें पसंद है। हमारे लिए संगीत जीवन जीने की कला है। वे बताते हैं कि वह पहली बार 1980 में भारत आये। वे अब तक 91 बार भारत आ चुके हैं। कहा कि हम भारत को बहुत ही पसंद करते हैं। अगर हम इसे पसंद नहीं करते तो कभी नहीं आते।

बेंजामिन अंग्रेजी के साथ ही हिंदी भी बोलते हैं। कभी कभी वे हिंदी में भी बात करने लगते हैं। कहा कि भारत संगीत व सभ्यता का देश है। वे महात्मा गांधी से इतने ज्यादा प्रभावित है कि वे अक्सर खादी कपड़ा पहनते हैं। कहा कि खादी गांधी के शांतिदूत के रूप में प्रचार करता है। हम उनको हृदय से मानते हैं। कहा कि भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया लेकिन आज भी बहुत कार्य ऐसे हैं जो नहीं हो पा रहे हैं। हम बहुत दु:खी है कि शिक्षा के प्रति यह देश उतना ध्यान नहीं दे रहा है। यही वजह है कि हम बच्चों को समान शिक्षा मिले यह चाह रहे हैं। अगर सभी बच्चों को शिक्षा मिलने लगे तो कोई भी देश जल्द ही ऊपर आ जायेगा। इसलिए भी चाइल्ड लेबर के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं। इसको लेकर हम पूरे विश्व में चाइल्ड एजुकेशन पर अभियान चला रहे है।