Children Day: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का बनारस या काशी से गहरा नाता था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और उसके बाद भी पं. नेहरू का इस शहर से जुड़ाव बना रहा। उनकी कई यादें और यात्रा काशी से जुड़ी हुई हैं, जो आज भी इस ऐतिहासिक शहर की दीवारों और संस्कृति में बसी हुई हैं।
Children Day: योग-व्यायाम में रुचि और काशी में शीर्षासन की प्रसिद्ध तस्वीर
पं. नेहरू का स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना और योग-व्यायाम के प्रति उनकी रुचि जगजाहिर थी। 1950 में उनके काशी प्रवास के दौरान नदेसर पैलेस में शीर्षासन करते हुए उनकी एक तस्वीर ली गई थी, जो आज भी इस शहर की धरोहर है। यह तस्वीर उनकी फिटनेस और अनुशासन के प्रति समर्पण को दर्शाती है और नदेसर पैलेस में गर्व से सजी हुई है।

काशी नरेश के साथ आत्मीय संबंध
प्रधानमंत्री बनने के बाद जब भी पं. नेहरू काशी आते, तो वे काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह के अतिथि होते। उनके साथ उनकी कई तस्वीरें नदेसर पैलेस में सजी हैं, जो दोनों के बीच के आत्मीय संबंधों को उजागर करती हैं। काशी की पवित्रता और यहां के सम्मानित व्यक्तित्वों से नेहरू का घनिष्ठ संबंध उनकी भारतीय संस्कृति के प्रति आदर को दर्शाता है।

तीन प्रधानमंत्रियों की दुर्लभ तस्वीर
काशी प्रवास के दौरान ली गई एक तस्वीर में तीन पीढ़ियों का अनोखा मेल दिखाई देता है: पं. नेहरू के साथ उनकी बेटी इंदिरा गांधी और गोद में नन्हे राजीव गांधी भी नजर आते हैं। यह तस्वीर काशी के प्रति उनके लगाव और परिवार के साथ बिताए क्षणों को जीवंत करती है।

विदेशी मेहमानों के साथ काशी का गौरव बढ़ाना
पं. नेहरू के कार्यकाल में काशी कई विदेशी हस्तियों का स्वागत करते हुए भारत की सांस्कृतिक धरोहर का परिचायक बनी। 1955 में रानी एलिजाबेथ द्वितीय और सऊदी अरब के शाह सऊद की काशी यात्रा इसके उदाहरण हैं। उस समय सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन आयोजित हुआ था, जहां पं. नेहरू की मेजबानी में दुनिया के कई नेता उपस्थित थे।
काशी से आत्मिक लगाव
पं. नेहरू का काशी से नाता केवल राजनैतिक ही नहीं, बल्कि आत्मिक और सांस्कृतिक भी था। उनके कुल 13 काशी प्रवास इस बात के साक्षी हैं कि वे इस प्राचीन शहर की धरोहर और उसकी परंपराओं से कितनी निकटता महसूस करते थे।
Highlights
पं. नेहरू और काशी का यह संबंध आज भी उस युग की यादें संजोए हुए है, और काशीवासियों के मन में उनका विशेष स्थान बना हुआ है।