वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज (UP College) को राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा देने की घोषणा के बीच एक अहम मोड सामने आया है। कॉलेज के संस्थापक ट्रस्ट की ओर से बुधवार को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिय स्कूल इंडाउमेंट ट्रस्ट, वाराणसी के अध्यक्ष मारिध्नमणि कान्त सिंह और सचिव आनन्द विजय के साथ ट्रस्ट के अन्य सदस्य शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय से संबंधित किसी भी प्रकार का समझौता या प्रस्ताव केवल ट्रस्ट के माध्यम से ही किया जाना वैध माने जाने की बात कही।
समिति का पंजीकरण 2021 में ही किया जा चुका है रद्द
दरअसल, हाल ही में कॉलेज (UP College) के शताब्दी समारोह में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कॉलेज को राज्य विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की गई और जिसके बाद यह जानकारी सामने आई कि यह समझौता उदय प्रताप शिक्षा समिति के माध्यम से किया जा रहा है। इसी को लेकर ट्रस्ट ने आपत्ति जताया है। ट्रस्ट का कहना है कि उदय प्रताप शिक्षा समिति फर्जीवाड़ा कर के पंजीकृत की गई थी और इसका पंजीकरण सहायक पंजीयक वाराणसी द्वारा 29 जनवरी 2021 को रद्द किया जा चुका है। बावजूद इसके वह इन मामलो में हस्तक्षेप कर रही है।

UP College: केवल ट्रस्ट को है सभी संवैधानिक अधिकार
प्रेस वार्ता में उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिय स्कूल इंडाउमेंट ट्रस्ट, वाराणसी (UP College) के सचिव आनन्द विजय ने कहा कि जब किसी संस्था का पंजीकरण धोखाधड़ी के आधार पर निरस्त हो चुका हो, तो वह संस्था किसी भी प्रकार के सार्वजनिक या शैक्षणिक कार्यों में अधिकृत नहीं मानी जा सकती। ऐसे में राज्य विश्वविद्यालय से संबंधित सभी निर्णयों और समझौतों का संवैधानिक अधिकार केवल उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिय स्कूल इंडाउमेंट ट्रस्ट को ही प्राप्त है।
वहीं ट्रस्ट के अध्यक्ष मारिध्नमणि कान्त सिंह ने कहा कि हम योगी सरकार का बहुत धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने यूपी कॉलेज (UP College) को राज्य विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की है। हम सरकार से अपील करते हैं कि राज्य विश्वविद्यालय से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में केवल ट्रस्ट को ही कानूनी पक्ष के रूप में मान्यता दी जाए न कि उस शिक्षा समिति को जिसका पंजीकरण खुद सरकार द्वारा रद्द किया जा चुका है।

