मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचेंगे। यह दौरा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि उस विकास विवाद की भी नब्ज टटोलने वाला है, जिसने बीते दिनों मणिकर्णिका घाट को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
मुख्यमंत्री (CM Yogi) का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है और प्राचीन मूर्तियों व मंदिरों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में सीएम योगी का स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करना कई संदेश देता है।
बाबा कालभैरव और विश्वनाथ मंदिर में करेंगे दर्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वाराणसी आगमन पुलिस लाइन हेलीपैड पर होगा। यहां से वे सीधे कालभैरव मंदिर जाएंगे और काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का दर्शन–पूजन करेंगे। मान्यता है कि कालभैरव के आशीर्वाद के बिना काशी में कोई भी कार्य पूर्ण नहीं माना जाता। ऐसे में सीएम का सबसे पहले कालभैरव मंदिर जाना उनके काशी दौरे को आध्यात्मिक आधार देता है।
इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेंगे और बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाकर प्रदेश की सुख–समृद्धि की कामना करेंगे। काशी विश्वनाथ धाम, जिसे योगी सरकार ने विश्वस्तरीय स्वरूप दिया है, मुख्यमंत्री (CM Yogi) के लिए न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि उनकी विकास दृष्टि का भी प्रतीक माना जाता है।
मणिकर्णिका घाट का CM Yogi करेंगे निरीक्षण
दर्शन–पूजन के बाद मुख्यमंत्री योगी सीधे मणिकर्णिका घाट पहुंचेंगे। यहीं इस दौरे का सबसे अहम और संवेदनशील पड़ाव होगा। अब मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) का स्वयं घाट पर पहुंचकर निरीक्षण करना यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे पर जमीनी हकीकत के आधार पर निर्णय लेना चाहती है, न कि सिर्फ बयानबाजी पर।
मणिकर्णिका घाट के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री (CM Yogi) सर्किट हाउस पहुंचेंगे। यहां वे जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में आगामी योजनाओं और राजनीतिक फीडबैक पर चर्चा हो सकती है। वाराणसी में कार्यक्रमों के समापन के बाद मुख्यमंत्री बाबतपुर एयरपोर्ट जाएंगे और वहां से राजकीय वायुयान से गुजरात के सूरत के लिए रवाना होंगे।
मणिकर्णिका घाट पर चल रहा नवीनीकरण कार्य
दरअसल, बीते दिनों मणिकर्णिका घाट पर चल रहे नवीनीकरण कार्यों के दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी मूर्तियों और प्राचीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया और इसे “विकास के नाम पर विरासत के विनाश” से जोड़ दिया। आरोपों ने इतना तूल पकड़ा कि काशी से बाहर इंदौर तक विरोध की आवाजें सुनाई देने लगीं।
हालांकि, सत्तापक्ष पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि कोई मंदिर या मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं की गई है। ड्रिलिंग के दौरान हुए वाइब्रेशन के कारण कुछ मूर्तियां हटाई गईं। सभी मूर्तियों को संस्कृति विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। कार्य योजनाबद्ध और तकनीकी मानकों के अनुसार हो रहा है। इसी की जमीनी हकीकत को और भी ज्यादा जानने के लिए सीएम योगी (CM Yogi) आज वाराणसी पहुंच रहे हैं

