Digital Arrest: कानपुर के शताब्दी नगर स्थित हिमालय भवन अपार्टमेंट में रहने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के रिटायर अधिकारी विनोद कुमार झा एक बेहद शातिर साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को इनकम टैक्स और सीबीआई अफसर बताकर उन्हें 44 दिनों तक डिजिटल गिरफ्त में रखा और उनकी पूरी जीवनभर की कमाई 86.30 लाख रुपए ठग लिए। इस दौरान पीड़ित को डराकर, धमकाकर और विश्वास में लेकर उनसे बार-बार रकम ट्रांसफर करवाई गई, पॉलिसी तुड़वाई गई, गोल्ड लोन करवा लिया गया और फ्लैट पर लोन की तैयारी भी कर ली गई थी।
कैसे शुरू हुई ठगी
17 फरवरी को 68 वर्षीय विनोद झा को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाला खुद को इनकम टैक्स ऑफिसर संजय त्रिपाठी बताकर दिल्ली से बोल रहा था। उसने आरोप लगाया कि विनोद झा ने दिल्ली के वजीरपुर स्थित मेसर्स ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी खोली है, जिसे अब तक रजिस्टर्ड नहीं कराया गया है, और उस पर 8.62 लाख रुपए का टैक्स बकाया है। जब विनोद झा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई कंपनी नहीं खोली है और वह शुगर व बीपी के मरीज हैं, इसलिए दिल्ली नहीं आ सकते, तो ठग ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि या तो वह ऑनलाइन FIR दर्ज कराएं या जेल जाने के लिए तैयार रहें।
Digital Arrest: डिजिटल गिरफ्त में लेने की शुरुआत
ठग ने उन्हें एक अन्य अफसर का नंबर दिया और कहा कि उस व्यक्ति को बताएं कि उनका नाम एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में संदिग्ध के रूप में जोड़ा गया है। इसके बाद उन्हें फर्जी पुलिस अफसर से जोड़ दिया गया, जिसने दावा किया कि उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया है और अब इसकी एक कॉपी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेज दी गई है। फिर केस के इन्वेस्टिगेशन अफसर इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और कथित सीबीआई अधिकारी पायल ठाकुर से बात करवाई गई।
पायल ने दावा किया कि यह केस 730 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी से जुड़ा है और इसकी जानकारी किसी को नहीं दी जा सकती। अगर दी गई तो तीन साल की जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगेगा।
भय और ब्रेनवॉश का जाल
विनोद झा बताते हैं कि वह इतना डर गए कि उन्होंने अपनी पत्नी, बेटों या किसी नजदीकी को इस बारे में कुछ नहीं बताया। वॉट्सऐप कॉल पर बात करते समय ठग वर्दी में नजर आते थे, उनकी मेज पर फाइलें होती थीं और दीवार पर सीबीआई का लोगो लगा होता था। यह सब देखकर उन्हें यकीन हो गया कि वाकई जांच चल रही है। यही डर और भ्रम उनका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया।
कैसे हड़पी गई रकम
ठगों ने सबसे पहले उनसे 49 लाख 50 हजार रुपए RTGS के माध्यम से ट्रांसफर करवाए। जब उनका बैंक अकाउंट खाली हो गया तो उन्होंने एलआईसी और एफडी की जानकारी ली। फिर 15 मार्च को 26 लाख रुपए की एलआईसी पॉलिसी तोड़वाकर अपने खातों में डलवाए। इसके बाद घर में रखी ज्वैलरी की जानकारी ली और उस पर 6.80 लाख का गोल्ड लोन लेकर रकम 24 मार्च को ट्रांसफर करवाई।
फ्लैट पर लोन की कोशिश
इसके बाद ठगों ने विनोद झा के फ्लैट से जुड़ी जानकारी मांगी और दस्तावेज दिखाने को कहा। वे 50 लाख रुपए का लोन कराने की योजना बना चुके थे। लेकिन इसी बीच एक बड़ी गलती ने ठगी का पर्दाफाश कर दिया। दरअसल, विनोद झा की पेंशन अप्रैल की शुरुआत तक नहीं आई थी, जिससे उन्हें चिंता हुई और उन्होंने पीएफ ऑफिस में काम करने वाले अपने भतीजे राजीव झा से संपर्क किया। राजीव ने अपने मुंबई में रहने वाले भाई से अकाउंट की जांच कराई तो पता चला कि 24 मार्च को विनोद झा ने 6.80 लाख का गोल्ड लोन लिया है, जबकि वह कभी लोन नहीं लेते थे।
परिवार को हुआ शक, फिर खुला पूरा मामला:
अचानक इतने बड़े ट्रांजैक्शन और लोन की जानकारी मिलने पर राजीव और उनके भाई को शक हुआ। जब उन्होंने चाचा से बातचीत की तो पूरी घटना सामने आई। उन्होंने फौरन पनकी थाना और साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। इस दौरान यह भी पता चला कि अगर थोड़ी और देर हो जाती, तो ठग फ्लैट पर लोन कराकर और रकम हड़पने की तैयारी में थे।
इंटरव्यू के दौरान फिर आया ठग का कॉल:
जब मीडिया की टीम विनोद झा से घटना के संबंध में बातचीत कर रही थी, उसी दौरान ठग का एक और कॉल आया। उसने फिर से खुद को सीबीआई अफसर बताया और विनोद झा से पूछा, “बाबू जी, तबीयत कैसी है? बस अब जांच पूरी होने वाली है, बस प्रॉपर्टी पेपर की जांच बाकी है।” लेकिन इस बार पास में परिवार और मीडिया की मौजूदगी के कारण विनोद झा बात नहीं कर पाए। ठग को शक हो गया और उसने वीडियो कॉल पर मोबाइल घुमाने को कहा, फिर कॉल काट दी।
कौन हैं विनोद झा?
विनोद कुमार झा EPFO में वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी (SSSA) और विजिलेंस ऑफिसर के पद से रिटायर हैं। वह पनकी के शताब्दी नगर के हिमालय भवन अपार्टमेंट में पत्नी रेनू झा के साथ रहते हैं। उनके दो बेटे हैं—हेमंत झा, जो कानपुर के आजाद नगर में बैंक कर्मचारी हैं, और अवनीश झा, जो सूरत में निजी कंपनी में कार्यरत हैं। देखरेख उनके भतीजे राजीव झा करते हैं, जो रामलीला मैदान के पास गीता नगर क्रॉसिंग पर रहते हैं। अब घटना के बाद विनोद झा और उनकी पत्नी, मानसिक स्थिति को देखते हुए, भतीजे के घर पर ही रह रहे हैं।
Highlights
अब तक पुलिस कार्रवाई
पीड़ित ने पनकी थाना और साइबर थाने में शिकायत की है। हालांकि खबर लिखे जाने तक FIR दर्ज नहीं हुई थी, केवल एक कंप्लेन रजिस्टर की गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए परिवार और समाज में यह सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े साइबर क्राइम में कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।