Guru Purnima के अवसर पर काशी के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में बुधवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। संतमत अनुयायी आश्रम, मठ गड़वाघाट और अघोर परंपरा के प्रमुख तीर्थ बाबा कीनाराम आश्रम, क्रीं कुंड में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी पहुंचे भक्तों ने गुरु दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

गंगा तट पर स्थित गड़वाघाट आश्रम में भोर से ही शिष्यों का आगमन शुरू हो गया था। पूरे दिन आश्रम परिसर में गुरु वंदना, पूजा-अर्चना और सत्संग का दौर चलता रहा। देर रात तक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते रहे। आश्रम परिसर में गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का वातावरण दिखाई दिया।
गड़वाघाट में गुरु परंपरा के अनुसार हुए अनुष्ठान
गुरु पूर्णिमा महोत्सव (Guru Purnima) की शुरुआत संतमत अनुयायी आश्रम के पूर्व पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 स्वामी आत्मविवेकानंद जी परमहंस सहित अन्य पीठाधीश्वरों की समाधियों पर पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुई। वर्तमान पीठाधीश्वर श्री श्री 108 स्वामी सरनानंद जी महाराज ने विधि-विधान से धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए।

इसके बाद गुरु परंपरा के अनुसार पीठाधीश्वर को विशेष आसन पर विराजमान कराया गया। संतों, शिष्यों और श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आरती की। यह क्रम पूरे दिन चलता रहा। शाम को आश्रम के विशाल सत्संग भवन में सद्गुरुदेव जी की भव्य महाआरती आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी सरनानंद जी महाराज परमहंस ने कहा कि मानव जीवन की पहचान उसके कर्मों से होती है। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म जीवन को सही दिशा देते हैं। सेवा और समर्पण को उन्होंने शिष्य की सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा बताया। उन्होंने कहा कि गुरु का सानिध्य व्यक्ति में सदाचार, अनुशासन, सेवा भावना और मानवता के संस्कार विकसित करता है।
Guru Purnima: देशभर से पहुंचे संत और अनुयायी
गड़वाघाट आश्रम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव (Guru Purnima) में विभिन्न स्थानों से संत और अनुयायी शामिल हुए। बाबा प्रकाशध्यानानंद, धर्मदर्शनानंद, सतज्ञानानंद और दिव्यदर्शनानंद सहित कई संतों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

कलकत्ता, मुंबई, हरिद्वार सहित अन्य आश्रमों से आए महात्माओं और स्थानीय भक्तों ने भी आयोजन में सहयोग किया। पूरे दिन श्रद्धालु गुरु सेवा, पूजा-पाठ और सत्संग में शामिल रहे।
क्रीं कुंड में अघोर पीठाधीश्वर के दर्शन को लगी लंबी कतार
वहीं अघोर परंपरा के प्रमुख केंद्र बाबा कीनाराम आश्रम, क्रीं कुंड में भी गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। अघोर पीठाधीश्वर सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन और आशीर्वाद के लिए देश-विदेश से पहुंचे भक्तों की लंबी कतार लगी रही।

सुबह से ही आश्रम परिसर में “जय बाबा कीनाराम” और गुरु वंदना के स्वर गूंजते रहे। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की करीब तीन किलोमीटर तक लंबी लाइन लगी रही। भक्त फूल-माला, नारियल और पूजा सामग्री लेकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
क्रीं कुंड में पूजा, सत्संग और भंडारे का आयोजन
गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के अवसर पर बाबा कीनाराम आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना, गुरु चरण वंदना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने क्रीं कुंड की परिक्रमा कर बाबा कीनाराम की समाधि पर मत्था टेका और आशीर्वाद लिया।

आश्रम परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन, सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचन होते रहे। अघोर परंपरा में गुरु को आत्मज्ञान और मानव सेवा का मार्ग दिखाने वाला सर्वोच्च स्थान दिया जाता है, इसलिए यहां गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है।

श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। प्रसाद के रूप में चने की घुघरी और हलवा वितरित किया गया, जिसे हजारों भक्तों ने ग्रहण किया। आश्रम के सेवक पूरे दिन व्यवस्था और सेवा कार्य में जुटे रहे।

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दोनों प्रमुख आश्रमों में श्रद्धालुओं (Guru Purnima) की भारी संख्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन किए। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी के दोनों प्रमुख आश्रम आध्यात्मिक आस्था और गुरु-शिष्य परंपरा के केंद्र के रूप में नजर आए।
