VNS: वाराणसी के प्रतिष्ठित नमो घाट पर काशी तमिल संगमम 3.0 का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और उद्यमिता को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि यह आयोजन आधुनिक भारतीय संस्कृति को आकार देने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।
“विविधता में एकता” का जीवंत उदाहरण बना संगमम
डॉ. मजूमदार ने काशी तमिल संगमम को संस्कृति के एकीकरण, प्रेम और सम्मान का महोत्सव बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह आयोजन भारत की एकता का प्रतीक बन गया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के संदर्भ में इसे भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का संकेतक बताया।
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति के समन्वय को सराहा
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक समृद्धि का संगम भारतीय परंपराओं की गहरी जड़ों को दर्शाता है। उन्होंने काशी को आध्यात्मिकता का केंद्र और तमिलनाडु को साहित्य, नृत्य और संस्कृति की धरोहर बताते हुए ओडिशा और तमिलनाडु के गहरे सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गंगा से कावेरी तक की एकता को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक बताया।

VNS: शिक्षा नीति और अनुसंधान में तेजी से प्रगति
कार्यक्रम की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सुनील कुमार बरनवाल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत हुए सुधारों का उल्लेख किया, जिससे शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, रोजगारपरक और शोध केंद्रित बनाया जा रहा है।
BHU के कुलपति ने आयोजन की सफलता पर जताया आभार
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति प्रो. संजय कुमार ने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी संस्थानों, शिक्षा मंत्रालय, अधिकारियों, कलाकारों और स्वयंसेवकों का आभार जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का मंच बना है।

गंगा-जमनी तहज़ीब और सांस्कृतिक एकता को मिला बल
काशी तमिल संगमम 3.0 ने उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता को और अधिक मजबूत किया है। यह न केवल आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बना, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी सशक्त किया।
Highlights
समापन समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने भारतीय संस्कृति और शिक्षा की विरासत को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें और आत्मनिर्भर, आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान दें।