- Sant Atulanand School के कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास मुख्य अतिथि के रूप में आयें
- दीपप्रजव्लन करके कार्यक्रम की हुई शुरुआत
Varanasi | संत अतुलानंद कांवेट स्कूल (Sant Atulanand School) में भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्कूल (Sant Atulanand School) के इंद्रधनूष सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने मुख्य अतिथि के रूप में आकर कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। जिन्होंने अपने कविता और प्रेरणा भरी बातों से सभागार (Sant Atulanand School) में उपस्थित सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य लोगों को प्रेरित किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि अमित कुमार सिंह, एनडीआरएफ, 11वीं बटालियन सेकेण्ड इन कमाण्ड ने शिरकत किया।

कार्यक्रम की शुरूआत डॉ. कुमार विश्वास और अमित कुमार सिंह ने दीपप्रजव्लन करके किया जिसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्कूल के सचिव राहुल सिंह ने उनका स्वागत व सम्मान किया। सचिव राहुल सिंह ने स्मृति चिन्ह देकर किया कुमार विश्वास का समान और इसके बाद कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।

इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आए डॉ. कुमार विश्वास ने अपने सम्बोधन की शुरूआत मौजूदा सभी बच्चों को भारत का भविष्य बताते हुए प्रणाम किया और बच्चों को डेस्टिनी का मतलब समझाया।

वहीं उन्होंने शिक्षा के आजादी और नियंत्रण पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस दिन प्रबंधक के चेयर से बड़ा प्रिंसिपल का चेंबर हो जाएगा उस दिन स्कूल अच्छा हो जाएगा क्योंकि शिक्षा नियंत्रण नहीं मांगती।
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वहीं बच्चों को प्रेरित करते हुए डॉ. कुमार विश्वास ने कहा आज इस दुनिया में जो भी बड़ा आदमी है, जिसने भी नाम कमाया है वह आप बच्चों से कम प्रबंधन और कम साधनों में पढ़ा है। शिक्षा एक ऐसा धन है जिसको प्राप्त करने के लिए त्रैलोक्य का स्वामी भी गुरूकुल की कुटिया में जाता है।

संघर्ष से ही मिलती है सफलता – सचिव, Sant Atulanand School
संत अतुलानंद स्कूल (Sant Atulanand School) के सचिव राहुल सिंह ने इस कार्यक्रम में कुमार विश्वास को लाने के पीछे के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए बताया कि कुमार विश्वास का संघर्ष से भरा था और वह एक संघर्षशील परिवार से है। और आज के समय में बच्चों के हदय में सबसे पहले संघर्ष की भावना लानी होगी क्योंकि संघर्ष से ही सफलता मिलती है इसीलिए कुमार विश्वास जो सभी के हदय में बसे हुए है, उन्होंने यहां आकर बच्चों को प्रेरित किया और यदि कक्ष में बैठे एक हजार बच्चों में से पांच के अंदर ही यह भावना चली गयी होगी तो हमारा यह कार्यक्रम सफल हुआ।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही समय को बिना गवाये श्रम करने का संकल्प बच्चों को दिलाया गया। डॉं कुमार विश्वास ने जीवन को 25-25 साल के तीन भागों में बांटा इसके साथ ही सबसे अच्छी बात जो उन्होंने शिक्षकों के लिए कहा कि सभी लोग एक समय आने पर रिटायर्ड हो सकते हैं लेकिन शिक्षक कभी रिटायर्ड नहीं हो सकते हैं। मुझे फिर मौका मिलेगा तो मैं फिर उनको जरूर बुलाउंगा और उन्होंने यह वादा भी किया है कि वह फिर आएंगे।