Lolark Kund: संतान सुख और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की कामना से जुड़ा महापर्व लोलार्क षष्ठी स्नान गुरुवार की मध्यरात्रि से काशी में शुरू हो गया। जैसे ही आधी रात बीती, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगाकर पुण्य स्नान की शुरुआत की। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर इस कुंड में स्नान करने से निसंतान दंपत्तियों की गोद भर जाती है और जीवन के दुख दूर हो जाते हैं।

कुंड (Lolark Kund) तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं की कतार करीब 5 किलोमीटर लंबी हो गई। आठों गलियां श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर गईं। हजारों लोग रात से ही लाइन में खड़े रहे। अनुमान है कि इस बार सवा से डेढ़ लाख लोग स्नान करेंगे।
डमरू वादन और आरती से हुई शुरुआत
स्नान महोत्सव की शुरुआत 51 डमरुओं की गूंज और आरती से हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं के जत्थे स्नान के लिए कुंड की ओर बढ़े। अधिकांश लोग उदया तिथि की मान्यता मानते हुए सूर्योदय के बाद डुबकी लगाने पहुंचे।

आस्था से जुड़ा है Lolark Kund
करीब 50 फीट गहरे और 15 फीट चौड़े इस प्राचीन कुंड तक तीन ओर से सीढ़ियां जाती हैं। मान्यता है कि यहां स्नान और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है। यही कारण है कि बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, बंगाल, नेपाल समेत दूर-दराज से दंपती इस दिन काशी आते हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए कुंड (Lolark Kund) की सुरक्षा के लिए जल पुलिस और NDRF को तैनात किया गया है। हर व्यक्ति को स्नान के लिए सिर्फ 30 सेकेंड का समय दिया जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा जवान श्रद्धालुओं से तीन डुबकियां लगवाकर तुरंत बाहर निकाल रहे हैं, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और किसी तरह की अनहोनी न हो।

काशी के तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इस दिन कुंड में स्नान और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा करने से दंपती संतान सुख प्राप्त करते हैं और शारीरिक कष्ट भी दूर होते हैं। यही कारण है कि हर साल यहां लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं।