Sharadiya Navratri 4th day : आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करने देवी मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान बुधवार को महिलाओं ने चौथा व्रत रख मंदिरों का रुख किया। इनकी पूजा करने से असाध्य से असाध्य रोगों से मुक्ति और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धर्म की नगरी काशी में माता का अतिप्राचीन मंदिर दुर्गाकुंड में स्थित है। माता के मंदिर के नाम पर ही इस मोहल्ले का नाम रखा गया है। मंगला आरती के बाद से ही श्रद्धालु दर्शन {Sharadiya Navratri 4th day} कतारबद्ध हैं। सिर्फ बनारस ही नहीं आस-पास के शहरों सहित प्रदेश से भी श्रद्धालु नवरात्र भर यहां मां के दर्शन करने आते हैं।
काशी के पंडित नवीन कुमार दुबे बताते हैं कि मां कुष्माण्डा का स्वरुप बहुत ही पावन है। मां की आठ भुजाएं हैं, इसलिए मां कूष्माण्डा अष्टभुजा वाली भी कहलाईं। इनके आठ हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा और माला है। मां कूष्माण्डा {Sharadiya Navratri 4th day} का वाहन सिंह है। जिनकी साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए कष्टों और बीमारियों से मुक्ति के लिए मंदिरों में महिलाओं-पुरुषों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है।
Sharadiya Navratri 4th day : मंदिर का उल्लेख ‘काशी खंड’ में भी
काशी के दुर्गाकुंड में स्थित कूष्मांडा देवी {Sharadiya Navratri 4th day} के मंदिर का उल्लेख ‘काशी खंड’ में भी है। इस भव्य दुर्गा मंदिर का जीर्णोद्वार 17वीं शताब्दी में रानी भवानी ने करवाया था। लाल पत्थरों से नागर शैली में बने इस मंदिर के एक तरफ कुंड है। मंदिर के समीप ही बाबा भैरोनाथ और लक्ष्मी, सरस्वती व मां काली की मूर्तियां स्थापित हैं। एक विशाल हवन कुंड मंदिर के अंदर है।
माता कूष्मांडा ने सृष्टि का किया विस्तार
मंदिर के महंत कौशल गुरु ने बताया कि माता कूष्माण्डा सभी दुःखों का निवारण करने वाली मां हैं। काशी के अति प्राचीन मंदिर दुर्गाकुंड में मां सौम्य रूप में विराजमान हैं और समस्त मनोकामना की पूर्ती करती हैं। पौराणिक मान्यता है की जब सृष्टि नहीं थी उस समय देवी भगवती के रूप माता कूष्मांडा ने सृष्टि का विस्तार किया था। उन्होंने बताया कि ये प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं।
माँ की मूर्ति स्वंय हुई थी प्रकट
बताते चले कि एक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित मूर्ति {Sharadiya Navratri 4th day} को मनुष्यों द्वारा नहीं बनाया गया है बल्कि यह मूर्ति स्वंय प्रकट हुई थी, जो लोगों की बुरी ताकतों से रक्षा करने आई थी। नवरात्रि और अन्य त्यौहारों के दौरान इस मंदिर में हजारों भक्तगण श्रद्धापूर्वक आते है। गैर – हिंदू लोगों को मंदिर के आंगन और गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इस मंदिर को बंदर मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि इस मंदिर के परिसर में काफी संख्या में बंदर उपस्थित रहते है।