Varanasi News: गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वाराणसी नगर निगम ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की योजना तैयार की है। गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक के व्यस्त मार्ग पर अब ठंडक भरी फुहारों का अहसास होगा। नगर निगम यहां 50 आधुनिक मिस्ट टावर (जिसे ‘राहत पोल’ भी कहा जा रहा है) लगाने जा रहा है, जिससे इस मार्ग पर चलने वाले लोगों को गर्मी से कुछ सुकून मिलेगा।
नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने जानकारी दी कि इस परियोजना पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन मिस्ट टावरों में पानी के टैंक लगाए जाएंगे, जो बारीक फुहार के रूप में पानी का छिड़काव करेंगे। यह तकनीक तापमान को 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है, जिससे राहगीरों और व्यापारियों को राहत मिलेगी।
फुटपाथ पर चलने वालों को मिलेगा सीधा फायदा
गोदौलिया से दशाश्वमेध मार्ग वाराणसी (Varanasi News) का सबसे अधिक पैदल आवाजाही वाला इलाका है। यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय निवासी आते-जाते हैं। इस पहल से विशेष रूप से वे लोग लाभान्वित होंगे जो इस रास्ते पर पैदल चलते हैं या घाटों की ओर रुख करते हैं।
स्प्रिंकलर मशीन का अपग्रेडेड वर्जन है मिस्ट टावर
इससे पहले नगर निगम (Varanasi News) ने गोदौलिया चौराहे पर एक स्प्रिंकलर मशीन लगाई थी, जो तय अंतराल पर बारीक पानी का छिड़काव करती थी। यह मशीन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक हर घंटे दो लीटर पानी खर्च करती थी और एक मिनट तक चलने के बाद 15 मिनट तक बंद रहती थी। प्रतिदिन यह करीब 24 लीटर पानी का इस्तेमाल करती थी, जिससे वातावरण में ठंडक बनी रहती थी।
इसी मॉडल को आधार बनाकर अब बड़े स्तर पर मिस्ट टावरों की योजना लागू की जा रही है। यह पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली और व्यापक दायरे में काम करने वाला सिस्टम होगा।
Varanasi News: अन्य जगहों पर भी हो सकती है शुरुआत
नगर आयुक्त (Varanasi News) ने बताया कि भविष्य में अगर यह योजना सफल रहती है तो अन्य प्रमुख स्थानों जैसे लंका, अस्सी घाट, मैदागिन और वाराणसी कैंट क्षेत्र में भी ऐसे मिस्ट टावर लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, कुछ इलाकों में परंपरागत तरीके से पानी के टैंकरों और स्प्रिंकलर वाहनों के जरिए भी सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।
ये मिस्ट टावर सिर्फ गर्मी से राहत ही नहीं देंगे, बल्कि हवा में उड़ती धूल को भी नियंत्रित करेंगे, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। स्वच्छता मिशन से जुड़ी यह पहल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी सकारात्मक मानी जा रही है।

