वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना ने अब तेजी से रफ़्तार पकड़ ली है। प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है और अब तक लगभग 34 मकानों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। वहीं इस परियोजना का काफी विरोध भी देखने को मिल रहा है। सड़क से लेकर सदन तक इसके विरोध की गूंज सुनाई दे रही है। इसी कड़ी में एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भी विधान परिषद में दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का मुद्दा उठाया और दुकानदारों व किरायदारों के पक्ष में, उनके हक के लिए अपनी आवाज बुलंद की।
MLC आशुतोष सिन्हाने बुलंद की अपनी आवाज
MLC आशुतोष सिन्हा ने चौड़ीकरण परियोजना के तहत की जाने वाली कार्रवाई को सही बताया लेकिन इसके साथ ही उन्होंने उन्होंने दुकानदारों को कहीं और विस्थापित करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि दालमंडी पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडियों में से एक है। यहाँ सिर्फ व्यापार नहीं होता बल्कि सभी धर्म के लोग एक साथ यहाँ निवास भी करते हैं। ये लोग गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए एकता का भी संदेश देते हैं। बावजूद इसके उन्हें यहाँ से उजाड़ा जा रहा। उनके घर-दुकान तोड़े जा रहे लेकिन उन्हें कहीं और बसाया नहीं जा रहा है जो कि नियमों के खिलाफ है।
हाकिम मोहम्मद जफर मार्ग नाम से हैं दिक्कत
विधान परिषद में अपनी बात रखते हुए MLC ने आगे कहा कि दालमंडी जिसे हाकिम मोहम्मद जफर मार्ग के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सभी धर्मों के व्यक्तियों के एकता का ऐसा संदेश देखने को मिलता है, जो कहीं और नहीं है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी दुकानें इस दालमंडी में हैं, जो गंगा जमुनी तहजीब का उदहारण है। ये लोग सभी पर्व भी एकसाथ मिलकर मनाते हैं। मगर इसका पुराना नाम हाकिम मोहम्मद जफर मार्ग है इसीलिए सरकार को इससे सबसे बड़ी दिक्कत है।
आशुतोष सिन्हा ने यह भी कहा कि गलियों के शहर बनारस की धड़कन दालमंडी है। यहाँ की गलियों को ही चौड़ा करके बनारस की आत्मा को खत्म करने की बात सरकार कह रही है। हम चौड़ीकरण का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन जिन दुकानों को तोडा जा रहा है, उन दुकानदारों का क्या। MLC आशुतोष सिन्हा ने आगे यह भी कहा कि उनकी रोजमर्रा की कमाई 500-हजार रूपये हैं, वह अब अपना जीवनयापन कैसे करेंगे। इसीलिए विकास प्राधिकरण उन दुकानदारों को कहीं और दूकान देता तो वो भी ध्वस्तीकरण में सहयोग करते।

