Nigam New Building: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्रस्तावित सदन भवन का निर्माण नागर शैली में किया जाएगा। इसका डिजाइन ऐसा होगा कि इसे देखने पर उत्तर भारत के किसी मंदिर का एहसास होगा। प्रस्तावित डिजाइन को शासन को भेजा जा चुका है, और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
90 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक सदन भवन
इस भवन का निर्माण वाराणसी की संस्कृति और महत्ता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। नगर निगम के नए भवन और सदन भवन की निर्माण लागत लगभग 90 करोड़ रुपये होगी। यह भवन 70,000 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल में फैला होगा और विश्वस्तरीय संसाधनों से लैस होगा।
Nigam New Building: पुरानी संरचनाओं में बदलाव
नए भवन के निर्माण के लिए मौजूदा परिसर में स्थित पुलिस चौकी को तोड़ा जाएगा और जलकल विभाग को भेलूपुर शिफ्ट किया जाएगा। निर्माण के तहत पुलिस चौकी, लाइसेंस विभाग, और रिकॉर्ड कक्ष समेत अन्य भवन हटाए जाएंगे।
सात मंजिला भवन, पहले चरण में तीन मंजिल निर्माण
नगर निगम का यह भवन सात मंजिला होगा, लेकिन निर्माण कार्य पहले तीन मंजिल तक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आगे की मंजिलें जोड़ी जाएंगी। महापौर के कक्ष से लेकर पार्षदों और अधिकारियों के लिए विशेष कक्ष बनाए जाएंगे।
उन्नत सुविधाएं और हाईटेक कंट्रोल रूम
इस भवन में हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से पूरे शहर पर नजर रखी जा सकेगी।
अन्य प्रमुख सुविधाएं:
- अंडरग्राउंड पार्किंग
- लिफ्ट और कैंटीन
- बैंक और पोस्ट ऑफिस
- पुलिस चौकी
- सचिव और प्रशासनिक दफ्तर
- इंजीनियरिंग और पशुपालन विभाग
- 300 लोगों की क्षमता वाला कांफ्रेंस हॉल
नगर निगम का दायरा बढ़ा, नई इमारत की जरूरत महसूस हुई
बीते दशक में नगर निगम का कार्यक्षेत्र बढ़ने और रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के बाद, नगर निगम में बड़ी बैठक के लिए कोई उपयुक्त हॉल नहीं बचा। इसके चलते मिनी सदन की बैठक टाउनहाल में हो रही है, जो नगर निगम कार्यालय से चार किलोमीटर दूर है। इससे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को असुविधा हो रही थी।
2025 में पीएम मोदी रख सकते हैं आधारशिला
योगी सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रखी जा सकती है। नगर निगम और राज्य सरकार ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
Highlights
नागर शैली में होगा वाराणसी का गौरव
यह भवन वाराणसी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा, जो आने वाले वर्षों में काशी के विकास का प्रतीक बनेगा।