Varanasi: मीर घाट स्थित शक्तिपीठ मां विशालाक्षी मंदिर में कुंभाभिषेक के निमित्त महत्वपूर्ण विधान पूरा किया गया। देवी के पूर्व स्थापित विग्रह को मंत्रोच्चार के बीच स्थान्तरित किया गया। प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही गर्भगृह के पट आमजन के लिए बंद कर दिए गए थे। आज 3 बजे के बाद सामान्य लोगों को करीब 45 घंटे बाद देवी के दर्शन मिलेगे
आपको बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर (Varanasi) से कुछ ही दूरी पर स्थित शक्तिपीठ मां विशालाक्षी मंदिर में आज प्राण प्रतिष्ठा होगी। साथ ही बताते चलें कि यह भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती के कान की मणि गिरी थी।
Varanasi:विग्रहों की प्राण प्रतिठा आज
मंदिर में काशी (Varanasi) की विशालाक्षी, कांची की कामाक्षी, मदुरै की मीनाक्षी, गणेश और कार्तिक भगवान के नए विग्रह स्थापित होंगे। इन सभी विग्रहों को रविवार की शाम नगर भ्रमण कराया गया था। भ्रमण शोभायात्रा मंदिर से आरंभ होकर मीरघाट, त्रिपुरा भैरवी, दशाश्वमेध होते गोदौलिया तक गई। उसके बाद पुन: मंदिर आकर समाप्त हुई। इन विग्रहों के निश्चित किए स्थानों पर प्राण प्रतिष्ठा होगी।
दक्षिण भारत के लोग भी हुए शामिल
प्रात:कालीन सत्र में गणपति पूजन किया गया। मंडपम पूजन, प्रधान कलश पूजन के बाद ‑आराधना की गई। तमिलनाडु से आए 11 वैदिकों ने मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ‑ हवन कराया। पूरा परिसर मंत्रध्वनि से गुंजायमान होता रहा। ये अनुष्ठान काशी नाट्टकोट्टई नगर क्षत्रम मैनेजिंग सोसाइटी (Varanasi) मेंहो रहा है। जिसमें दक्षिण भारत से आए भक्तगण भी शामिल हुए हैं। समस्त धार्मिक अनुष्ठान डॉ।शिवाश्री केपी गुरुकल के आचार्यत्व में हो रहा है।

