BHU: काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में डेरी फार्म, प्रिंटिंग प्रेस और एरोड्रम को बंद करने की खबर आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्र अध्यापक और कर्मचारियों में में भारी आक्रोश है। साथ ही कुलपति के प्रति नाराजगी है। विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही है।
छात्रों का आरोप है कि कुलपति आज तक विद्वत परिषद EC का गठन नहीं किए हैं तथा अपनी हिटलरशाही चल रहे हैं। छात्रों की फीस बढ़ा दी गई है। इन सभी मुद्दों पर भी छात्रों ने नाराजगी जताई। इसी क्रम में शनिवार को छात्रों ने बड़े पैमाने पर आक्रोश मार्च का आयोजन किया। जिसमें सभी छात्र संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

छात्रों ने परिसर स्थित मालवीय भवन से लेकर सिंह द्वार (BHU) तक आक्रोश मार्च किया। उन्होंने हाथ में नारे लिखे तख्तियां व पोस्टर लेकर आक्रोश मार्च किया। जिससे उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी। छात्रों ने महिला महाविद्यालय चौराहे पर आकर सभा भी किया। डॉ० अरविंद शुक्ला ने कहा कि BHU कुलपति की तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी और उनको अपनी गलती आज भुगतनी पड़ेगी। गो संरक्षण एक सरकारी उपक्रम है और कुलपति महोदय अपनी तानाशाही दिखा रहे हैं, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शोध छात्र अभिषेक सिंह काली ने कहा कि बेलगाम कुलपति को वापस जाना पड़ेगा तथा छात्र इनके मंशा पर पानी फेरने का कार्य करेंगे तथा उनकी ईंट बजा देंगे।

BHU: छात्र बोले – इंट से इंट बजा देंगे
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इकाई अध्यक्ष प्रशांत राय ने कहा कि वर्तमान कुलपति बेलगाम हो गए हैं और इनको कल्याण आंदोलन का सामना करना पड़ेगा और छवि छात्र संगठन उसके लिए कमर कस के तैयार हैं। NSUI के रोहित राणा ने कहा कि ने कहा कि सरकार छात्र विरोधी है और शिक्षा का निजीकरण कर रही है और कुलपति जी सरकार में हैं इसलिए विश्वविद्यालय को बेचने पर तुले हुए हैं, इसके लिए हम लोग लगातार आंदोलन करेंगे।
कुंवर पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की धरोहर बचाने के लिए हम लोग हर तरह से लड़ाई लड़ने को तैयार हैं तथा कुलपति के तानाशाही रवैये के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। आक्रोश मार्च में प्रमुख रूप से डा० अवनिंद्र राय, शुभम तिवारी, डॉ० चक्रपाणि ओझा, वैभव तिवारी, अधोक्षज पांडे, गोपाल सिंह, विवेक सिंह अभिषेक, रिंकू सिंह, साक्षी सिंह, प्रफुल पांडे, पतंजलि पांडे, सत्यवीर, सुयग्य राय, कैलाश वर्मा, कुलदीप क्रांतिकारी , हिमांशु, रोहित राय आदि हजारों की संख्या में छात्र अध्यापक कर्मचारी मौजूद रहे।