Heat Stress: भारत में पशुपालन किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण साधन है। गाय, भैंस, बकरी जैसे पशु किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लेकिन गर्मियों (Heat Stress) के मौसम में जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब पशुओं के स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण पशुओं में थकान, कमजोरी और हीट स्ट्रेस जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं।

अधिक गर्मी के कारण पशु कम चारा खाते हैं और उनका दूध उत्पादन भी घटने लगता है। कई बार पशु बीमार भी पड़ सकते हैं। इसलिए गर्मियों में पशुओं की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि उनका स्वास्थ्य अच्छा बना रहे और उत्पादन में कमी न आए।
हवादार और ठंडी पशुशाला की व्यवस्था

गर्मियों (Heat Stress) में पशुओं को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहाँ पर्याप्त छाया और हवा का प्रबंध हो। पशुशाला खुली और हवादार होनी चाहिए, ताकि गर्म हवा बाहर निकल सके और अंदर ठंडा वातावरण बना रहे। यदि पशुशाला की छत टीन या लोहे की है तो उसके ऊपर फूस, घास या मिट्टी डाल देना चाहिए। कई किसान छत पर सफेद रंग भी कर देते हैं, जिससे धूप का असर कम हो जाता है। इससे पशुशाला का तापमान कम रहता है।
पशुशाला के आसपास पेड़-पौधे लगाना भी बहुत लाभदायक होता है। पेड़ों से छाया मिलती है और वातावरण भी ठंडा रहता है। इससे पशुओं को गर्मी से काफी राहत मिलती है।
पर्याप्त पानी और संतुलित आहार

गर्मियों (Heat Stress) में पशुओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए उन्हें दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी पिलाना चाहिए। पानी की कमी होने से पशु कमजोर हो सकते हैं और उनका दूध उत्पादन भी कम हो सकता है। पशुओं के भोजन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्मियों में हरा चारा अधिक मात्रा में देना चाहिए, जैसे ज्वार, मक्का और नेपियर घास। हरा चारा पचने में आसान होता है और पशुओं को जरूरी पोषक तत्व भी देता है।

इसके साथ ही सूखा चारा, दाना, खनिज मिश्रण और नमक भी संतुलित मात्रा में देना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि पशुओं को सुबह और शाम के ठंडे समय में ही चारा दिया जाए।
Heat Stress: नहलाना और साफ-सफाई का ध्यान

गर्मियों (Heat Stress) में पशुओं को ठंडक देने के लिए दिन में एक या दो बार पानी से नहलाना बहुत फायदेमंद होता है। इससे उनके शरीर का तापमान कम रहता है और उन्हें राहत मिलती है। भैंसों को यदि तालाब या पानी में बैठने की सुविधा मिल जाए तो उन्हें गर्मी से काफी आराम मिलता है। इससे उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसके अलावा पशुशाला की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गोबर और गंदगी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मक्खियाँ और कीटाणु नहीं फैलते और पशु बीमारियों से बचे रहते हैं।
पशुओं के स्वास्थ्य पर रखें नजर
गर्मियों (Heat Stress) में पशुओं के व्यवहार और स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी होता है। यदि पशु ज्यादा हाँफ रहा हो, सुस्त दिखाई दे रहा हो या चारा कम खा रहा हो, तो यह गर्मी के असर का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में पशु को तुरंत छायादार और ठंडी जगह पर रखना चाहिए और उसे पर्याप्त पानी देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना भी जरूरी होता है।
अंत में कहा जा सकता है कि गर्मियों के मौसम में पशुओं की सही देखभाल करना हर पशुपालक किसान की जिम्मेदारी है। यदि पशुओं को छायादार स्थान, साफ पानी, संतुलित आहार और स्वच्छ वातावरण मिले तो वे स्वस्थ रहते हैं और उनका उत्पादन भी अच्छा बना रहता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे गर्मियों में पशुओं की विशेष देखभाल करें।
