UP के तहसील मोहनलालगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय से बड़ी ही चौका दने वाली खबर सामने आयी है। नेवाजखेड़ा में स्थित विद्यालय में बच्चों की वितरित करने के लिए आयी किताबों को महीनों से कमरे में बंद रखा है। वहीं सर्दियों की छुट्टी होते हीक प्रधानाध्यापक मौका निकलकर किताबों को कबाड़ी वाले को बेच दिया। वहीं मामले की सुचना मिलते ही बीईओ की टीम मौके पर पहुंचे। उनके जाते ही चारों तरफ से ग्रामीणों ने घेर लिया और प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई करने की मांग की है।
सरकार (UP) द्वारा बच्चों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधर के लिए नये नये तरीकों की खोज में लगी रहती हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की बौद्धिक गुणवत्ता को परखने के लिए निशुल्क किताबों के साथ ही कार्य पुस्तिका भी दी जाती है। मोहनलालगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय नेवाजखेड़ा में कार्यपुस्तिकाएं बच्चों को देने की बजाय उसे पिछले छह माह से कमरे में बंद थीं।
UP:जाँच के लिये भेजा गया बीईओ की टीम
हाल ही सर्दियों की छुट्टी में विद्यालय (UP) को सुनसान पाकर प्रधानाध्यापक ने 11 रूपये/किलो के हिसाब से सभी कितबों को 2200 रूपये में कुल दो कुंतल किताबों को बेच दिया। हांलाकि इस मामले की खबर खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार को मिलते ही उन्होंने बीईओ की टीम को मौके पर भेजा।
हांलाकि इस मामले की कड़ी छानबीन व पूछताछ किया जा रहा है। बता दें कि मंगलवार को कबाड़ी को किताबें बेंचे जाने का मामला प्रकाश में आया था। विद्यालय से ठेलिया लेकर जैसे ही कबाड़ी वाला निकला तो ग्रामीणों (UP) ने घेर लिया था। बोरियां खोले जाने पर नई किताबें निकली थी। इसका वीडियो भी ग्रामीणों ने ही बनाया था। जिसके बाद उस पर कड़ी कार्रवाई किया जा रहा है।

