- मीटर लगाने वाली एजेंसी ने मांगी अतिरिक्ति धनराशि
- राज्य उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश ने जतायी आपत्ति
जितेंद्र श्रीवास्तव
वाराणसी। वाराणसी समेत उन तमाम जिलों में 4जी स्मार्ट मीटर लगाने की योजना फिलहाल टलती नजर आ रही है। वजह, स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी एनर्जी एफिशिएंसी लिमिटेड (ईईएसएल) ने नई तकनीक के 4जी स्मार्ट मीटर लगाने के लिए अतिरिक्त धनराशि की डिमांड की है। पिछले दिनों केंद्र में हुई एक बैठक में इसकी मांग कंपनी ने उठाई है। यदि सरकार ने अतिरिक्त धनराशि देने से इंकार कर दिया तो फिलहाल हर घर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना लटक सकती है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार में पिछले दिनों हुई बैठक में केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के चेयरमैन एम देवराज और ईईएसएल के अधिकारी मौजूद थे। इसी बैठक में ईईएसएल के प्रतिनिधियों ने 4जी स्मार्ट मीटर लगाने के लिए करार के अतिरिक्त धनराशि देने की बात कही थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो अगर 4जी स्मार्ट मीटर लगाने की कॉस्ट को कंपनी की मांग के मुताबिक बढ़ाया जाता है तो इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसका सीधा असर महंगी बिजली के रूप में देखने को मिल सकता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन फिलहाल ईईएसएल को अतिरिक्त रकम नहीं देना चाहता है। इसके पीछे पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों का तर्क है कि चूंकि टेंडर पहले हो चुका है। उसी के मुताबिक कीमतें तय हुई हैं। ऐसे में नई कीमत तय करने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ आएगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ देने के मूड में नहीं है। अतिरिक्त धनराशि न मिलने पर 4जी स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया फिलहाल टल सकती है। हालांकि कार्यदायी एजेंसी की तरफ से मांगी गयी अतिरिक्त धनराशि पर राज्य उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश ने आपत्ति जता दी है।
तत्कालीन ऊर्जा मंत्री ने रोक दिया था 4जी स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया
विभागीय सूत्रों की मानें तो ईईएसएल को उत्तर प्रदेश में 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाने थे। इसमें से 12 लाख स्मार्ट मीटर कंपनी लगा भी चुकी है। कुछ खामियां आने और उपभोक्ताओं के प्रबल विरोध के बाद प्रदेश के तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने 4जी स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना पर रोक लगा दी थी। अब जब दोबारा इस योजना को शुरू किया गया। तो कंपनी ने कीमत बढ़ाए जाने की मांग उठाते हुए नए मीटर लगाने का काम रोक दिया है। अभी करीब 28 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं।
उपभोक्ता परिषद ने उठाई जांच की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पूरे मामले में जांच की मांग उठाई है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पहले जो शर्तें तय हो गई हैं। योजना के बीच में उनमें बदलाव कैसे किया जा सकता है। पहले से तय शर्तों के मुताबिक ईईएसएल को प्रति मीटर हर महीने करीब 103 रुपये मिलता है। आठ साल के लिए बनी इस योजना के तहत तकनीक में बदलाव का पूरा खर्च मीटर लगाने वाली कंपनी को उठाना था। ऐसे में अतिरिक्त धनराशि की मांग करना जायज नहीं है।