Varanasi: सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल सेंटर में प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा के कृतित्व और व्यक्तित्व पर केंद्रित सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. इन्द्रीवर की सद्य: प्रकाशित पुस्तक अग्निरथ का सारथी पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और संस्कृति जगत से जुड़ी अनेक गणमान्य हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने मनु शर्मा के साहित्यिक योगदान, वैचारिक गहराई और हिंदी साहित्य में उनके विशिष्ट स्थान पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजन मनु शर्मा की 98वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

बगेश्वेर बाबा के पहुंचे टी उत्साहित हुए लोग
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पहुंचे। जैसे ही बगेश्वेर बाबा रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर (Varanasi) के सभागार में पहुंचे, पुरे हॉल में सिर्फ और सिर्फ उनके जय-जयकार गूंज उठे। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और मंचासीन हुए।

कई गणमान्यजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इसके आलावा केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत वर्चुअली तौर पर कार्यक्रम में जुड़े रहें। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी और एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा संग अन्य गणमान्यजन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।

सभी मंचासीन अतिथियों ने मिलकर दीपप्रज्वलन किया और उत्साह की रौशनी बहकर कार्य्रकम का आगाज किया। एक तरफ दीपप्रज्वलन और दूसरी तरफ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Varanasi) के मुख्य पुजारी श्रीकांत मिश्रा के द्वारा किया जा रहा वैदिक मंत्रोचार ने मानो सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दीपप्रज्वलन करके पद्मश्री मनु शर्मा के चित्र पर माल्यापर्ण करके उन्हें नमन किया गया।

अथित्यों का किया स्वागत व सम्मान
कार्यक्रम में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बागेश्वर बाबा का स्वागत किया। उन्हें शॉल ओढ़ाया, बुके और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। वहीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य का स्वागत अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत व सम्मान किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल का स्वागत व सम्मान आयुष मंत्री दया शंकर मिश्र ‘दयालु’ (Varanasi) ने अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर किया। स्वागत सम्मान की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अन्य मंचासीन अतिथियों का स्वागत मेयर अशोक तिवारी ने किया। इसके आलावा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठकका स्वागत-सत्कार हेरिटेज हॉस्पिटल के ओनर सिद्धार्थ राय ने किया।

अतिथियों के स्वागत-सम्मान के बाद पद्मश्री पंडित मनु शर्मा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री को चलाया गया। जिसे देखकर उनके बेटे हेमंत शर्मा भावुक हो गए।
उनकी कवितायेँ अपने समय का दस्तावेज- हेमंत शर्मा
वहीं कार्यक्रम (Varanasi) को संबोधित करते हुए पद्मश्री मनु शर्मा के बेटे हेमंत शर्मा ने कहा कि मनु शर्मां ने साहित्य की हर विधा में लिखा है। उनके समृद्ध रचना-संसार में आठ खंडों में प्रकाशित “कृष्ण की आत्मकथा’ भारतीय भाषाओं का विशालतम उपन्यास है। ललित निबंधों में वे अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो उनकी कविताएं अपने समय का दस्तावेज हैं। उनका जन्म सन् 1927 की शरद पूर्णिमा को अकबरपुर, फैजाबाद में हुआ। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में शिक्षा लीl

उन्होंने आगे कहा कि आज प्रख्यात साहित्यकार, पौराणिक और सांस्कृतिक उपन्यासों के पुरोधा पद्मश्री मनु शर्मा की आज जयंती है। पुराने इतिहास में रमना, लोगों से मिलना-जुलना, संगीत में विचरना, खूब पढ़ना और पढ़ाना, उत्सव मनाना और लोगों को इकट्ठा कर भोजन कराना उन्हें अच्छा लगता था। इसी परंपरा में यह आयोजन है।

Varanasi: बगेश्वेर बाबा का सुनने के इन्तजार में बैठे रहें लोग
कार्यक्रम (Varanasi) की अगली कड़ी में उसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदी साहित्य के महाकथाकार पद्मश्री पंडित मनु शर्मा पर आधारित पुस्तक ‘अग्निरथ का सारथी’ का विमोचन किया और इसके बाद आई बगेश्वेर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बोलने की कड़ी। ऐसा लग रहा था सभी उन्हें सुनने के ही इंतज़ार में बैठे हो। बाबा बागेश्वर को सुनने के लिए हाल खचाखच भरा हुआ था। करीब 2500 लोग पहुंचे थे।

जिसका गुरु ज्ञानी है वो पहलवान– धीरेंद्र शास्त्री
इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि काशी तो फकीरों की है। जहां के लोग जो शंकराचार्य को चुनौती दे देते हैं। चेतन मन और अवचेतन मन को पढ़ने की कला परकाया प्रवेश है। कहते बहुत लोग हैं लेकिन जीते बहुत कम लोग हैं। ज्ञान केवल गुरु या ग्रंथ से मिलता है, जिसका गुरु ज्ञानी है वो पहलवान है। कहा- कृष्ण परिपूर्ण थे। ज्ञान में भी परिपूर्ण थे। युद्ध में भी परिपूर्ण थे। बांसुरी भी बजाते थे। चक्र भी घुमाते थे।
बगेश्वेर बाबा ने आगे कहा कि काशी हमारे भारत की शान है। मैं जब 14 साल का था। तब दादा का साथ काशी आया था। काशी की गलियां, काशी का ज्ञान, काशी (Varanasi) के विद्वान और काशी के पान का आनंद लिया। मैंने बाबा काशीनाथ को देखा, मैंने भैरवनाथ को भी देखा।

