Varanasi: नव संस्कृति-साहित्य संघ, विद्याश्री न्यास, साहित्यिक संघ एवं जिला पुस्तकालय, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में “प्रो. उर्मिला मिश्र शब्द संवाद” का पंद्रहवां आयोजन वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित जिला पुस्तकालय में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. इंदिवर कृत पुस्तक ‘समाजवाद प्रयोग और पतन’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में साहित्यिक विमर्श के साथ काव्य पाठ भी आयोजित किया गया, जिसमें साहित्यकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का आगाज
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम (Varanasi) के मुख्य अतिथि सदस्य विधान परिषद धर्मेंद्र राय रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता गांधी विचारधारा के चिंतक दीपक मालिक ने की। मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. सुरेंद्र प्रताप उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार, दयानिधि मिश्र सहित अनेक साहित्यप्रेमी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रीति ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत कवि सिद्धनाथ शर्मा द्वारा माँ सरस्वती की वंदना के काव्य पाठ से हुई, जिसने पूरे वातावरण को साहित्यिक और आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया।

Varanasi: पुस्तक पर विस्तार से हुई चर्चा
इसके बाद प्रो. इंदिवर ने अपनी पुस्तक ‘समाजवाद प्रयोग और पतन’ पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि यह पुस्तक विश्व और भारत में समाजवादी विचारधारा के उदय, उसके प्रयोगों तथा समय के साथ उसके पतन के कारणों का विश्लेषण करती है।

उन्होंने कहा कि समाजवाद ने एक समय सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक संतुलन की बड़ी आशा जगाई थी, लेकिन विभिन्न देशों में उसके प्रयोगों के दौरान कई राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक चुनौतियाँ सामने आईं, जिनका गंभीर अध्ययन इस पुस्तक में किया गया है। पुस्तक (Varanasi) में सोवियत संघ, पूर्वी यूरोप और अन्य देशों के समाजवादी प्रयोगों का विश्लेषण करते हुए यह समझने का प्रयास किया गया है कि किन कारणों से यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई।

समाजवाद सामाजिक परिवर्तन का नया अध्याय
मुख्य वक्ता प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने पुस्तक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजवाद केवल एक राजनीतिक विचारधारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उन्होंने कहा कि प्रो. इंदिवर की यह पुस्तक (Varanasi) समाजवादी विचारधारा के ऐतिहासिक और वैचारिक पक्षों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

मुख्य अतिथि एमएलसी धर्मेंद्र राय ने कहा कि साहित्य और विचार विमर्श समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों से बौद्धिक संवाद को बल मिलता है और नई पीढ़ी को भी विचारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम (Varanasi) की अध्यक्षता कर रहे दीपक मालिक ने कहा कि गांधीवादी विचारधारा और समाजवादी चिंतन दोनों ही सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने इस पुस्तक को समकालीन राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के लिए प्रासंगिक बताया।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार और दयानिधि मिश्र सहित अन्य वक्ताओं ने भी पुस्तक और समाजवादी विचारधारा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत (Varanasi) में काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, बुद्धिजीवी, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

