Varanasi: मोक्षदायिनी काशी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र महाश्मशान घाटों पर अब शवों का पंजीकरण पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और नि:शुल्क होगा। नगर निगम की इस नई व्यवस्था का शुभारंभ बसंत पंचमी के अवसर पर महापौर अशोक कुमार तिवारी ने हरिश्चंद्र घाट पर फीता काटकर किया। इस पहल का उद्देश्य घाटों पर होने वाले अंतिम संस्कारों का सटीक और वास्तविक आंकड़ा एकत्र करना तथा परिजनों को सुविधा प्रदान करना है।

मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने में भी मिलेगी सहूलियत
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल आंकड़ों के संकलन के लिए है और इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। पंजीकरण के दौरान परिजनों से मृतक से जुड़ी सामान्य जानकारी ली जाएगी, जिससे आगे मृत्यु प्रमाणपत्र जारी (Varanasi) कराने में भी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की यह पहल सिर्फ श्मशान घाटों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मुस्लिम और ईसाई समाज के लिए शहर के 12 प्रमुख कब्रिस्तानों पर भी जल्द ही कंप्यूटरीकृत मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाएगी।

Varanasi: तीन शिफ्टों में 24 घंटे की ड्यूटी
नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने घाटों पर कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में 24 घंटे की ड्यूटी लगाई है। ये कर्मचारी हर आने वाले शव का नाम, पता और आयु जैसी बुनियादी जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज करेंगे। इससे अब तक घाटों (Varanasi) पर दर्ज न हो पाने वाले शवदाह के आंकड़ों को व्यवस्थित और विश्वसनीय रूप से संकलित किया जा सकेगा।

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से श्मशान घाटों (Varanasi) के प्रबंधन में सुधार होगा और निगम के पास एक सशक्त डेटाबेस तैयार होगा, जो भविष्य की नगरीय योजनाओं और सुविधाओं के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय पार्षद राजेश यादव चल्लू, पार्षद विजय द्विवेदी, पार्षद रविंद्र सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष अनुराग शर्मा सहित नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
हरिश्चंद्र घाट (Varanasi) पर इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत पहली शवदाह पंजीकरण पर्ची सोनभद्र निवासी 18 वर्षीय लवकुश शर्मा के नाम जारी की गई। पंजीकरण संख्या 2026-HARI-00001 वाली इस पर्ची में क्यूआर कोड भी अंकित है, जिससे डेटा की सुरक्षा और सत्यापन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

