Varanasi: शिवपुर थाना क्षेत्र के पिसौर स्थित प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर कक्षा चार में पढ़ने वाली चार नाबालिग छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का आरोप है कि प्रधानाध्यापक पद्माकर सिंह उर्फ पद्माकर सिंह कई दिनों से उन्हें अकेले बुलाकर अश्लील वीडियो दिखाता था और गलत स्थानों पर स्पर्श करता था। पीड़ित छात्राओं (Varanasi) ने बताया कि शनिवार को भी इसी तरह की घटना हुई, जिसके बाद वे रोते हुए घर पहुंचीं और परिजनों को आपबीती बताई। परिजनों का कहना है कि इससे पहले भी बच्चियों ने संकेत दिए थे, लेकिन डर और धमकी के कारण खुलकर नहीं बता सकीं। प्रधानाध्यापक बच्चियों को धमकाता था कि यदि घर में बताया तो उनकी पिटाई की जाएगी।

सोमवार को फूटा ग्रामीणों का आक्रोश
शनिवार के बाद रविवार को विद्यालय बंद होने के कारण परिजन (Varanasi) स्कूल नहीं पहुंच सके। सोमवार सुबह करीब नौ बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन विद्यालय पहुंचे और आरोपी प्रधानाध्यापक को बंधक बना लिया। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

Varanasi: पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
मौके पर डीसीपी वरुणापार प्रमोद कुमार, एडीसीपी नीतू कात्यायन, एसीपी नितिन तनेजा, बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव सहित शिवपुर थाने समेत पांच थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। पुलिस ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए आरोपी प्रधानाध्यापक को हिरासत में ले लिया।
परिजनों का बयान
पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि प्रधानाध्यापक बच्चियों को अश्लील वीडियो दिखाता था और जब वे शौचालय जाती थीं तो पीछे-पीछे जाकर गलत हरकत करता था। डर और धमकी के कारण बच्चियां लंबे समय तक चुप रहीं, लेकिन शनिवार की घटना के बाद उन्होंने सच बता दिया।

कार्रवाई शुरू
बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपी प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सत्य पाए गए तो कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसीपी नितिन तनेजा ने बताया कि पीड़ित पक्ष से तहरीर प्राप्त हो गई है, मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
घटना के बाद ग्रामीणों (Varanasi) में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

