Varanasi: गंगा किनारे मोक्षधाम मणिकर्णिका घाट पर शनिवार की सुबह एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली। लकड़ी दुकानदारों के अवैध अतिक्रमण से आक्रोशित डोम परिवार ने सुबह सात बजे ही शवों का अंतिम संस्कार रोक दिया। घाट पर अचानक रुक गए चिताओं के धुएं ने परिजनों को स्तब्ध कर दिया और कई शवों को नौका से हरिश्चंद्र घाट ले जाना पड़ा।

72 घंटे का अल्टीमेटम और प्रशासन की चुप्पी
डोम परिवार ने पहले ही जिला प्रशासन (Varanasi) और नगर निगम को चेतावनी दी थी कि यदि घाट को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया तो वे विरोध करेंगे। अल्टीमेटम के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस रहे, जिसके बाद उन्होंने शवों को लौटाना शुरू कर दिया। यह कदम घाट पर अंतिम संस्कार की परंपरा को ठहराने वाला साबित हुआ।

Varanasi:एसीपी की फटकार और कार्रवाई
स्थिति की जानकारी मिलते ही एसीपी (Varanasi) दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने डोम परिवार को फटकार लगाते हुए तुरंत शवों का अंतिम संस्कार शुरू करवाया। हालांकि, आधे घंटे तक शवदाह बंद रहने से तीन से चार शव हरिश्चंद्र घाट भेजे गए।

इसके बाद एसीपी ने सख्त तेवर दिखाते हुए लकड़ी व्यवसायी (Varanasi) संजय सिंह, अरुण सिंह और चैनु प्रसाद गुप्ता को फटकार लगाई और अतिक्रमण हटवाने का आदेश दिया। देखते ही देखते घाट पर दर्जनों मजदूर लगाकर लकड़ी की टाल हटाई जाने लगी।
24 घंटे का अल्टीमेटम
एसीपी (Varanasi) त्रिपाठी ने घाट पर मौजूद दर्जनों दुकानदारों को सख्त चेतावनी देते हुए 24 घंटे के भीतर अतिक्रमण पूरी तरह हटाने का निर्देश दिया। घाट पर प्रशासन की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

