Varanasi: दुर्गा पूजा के बाद गंगा में मूर्ति विसर्जन कराने के समर्थन में काशी के पूजा-पंडाल समितियों और व्यापारियों में अपनी आवाज बुलंद की है। कुंडों, पोखरों व तालाबों में मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक को लेकर वाराणसी शहर के दुर्गा पूजा समितियों ने 29 सितंबर, सोमवार को अपने-अपने पंडालों में शाम 6 से 7 बजे तक ब्लैकआउट करने का ऐलान किया है। इसका समर्थन प्रमुख व्यापारी संगठनों ने भी दिया है।
गंगा हमारी धार्मिक पहचान
केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष तिलक राज मिश्रा ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर इसका ऐलान किया और कहा कि मूर्ति विसर्जन हिंदू धर्म की आस्था, परंपरा और संस्कार से जुड़ा है। गंगा हमारी धार्मिक पहचान का केंद्र है और उसे अशुद्ध नहीं माना जा सकता।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर पूरी तरह रोक लगाकर केवल ईको-फ्रेंडली मिट्टी की प्रतिमाएं (Varanasi) बनाई जाएं। साथ ही विसर्जन के दौरान क्रेन की मदद से लकड़ी और पुआल अलग निकाल लिए जाएं, ताकि गंगा में केवल मिट्टी ही जाए।
Varanasi: पारंपरिक विसर्जन की मिलनी चाहिए अनुमति
वहीं वाराणसी (Varanasi) व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि मां दुर्गा की आराधना के बाद प्रतिमा को सड़क किनारे या खुले में छोड़ देना धार्मिक परंपरा का अपमान है। इससे श्रद्धालु गहरी पीड़ा महसूस करते हैं। इस मामले में स्थायी समाधान निकालकर पारंपरिक विसर्जन की अनुमति मिलनी चाहिए।
पूजा समितियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए ईको-फ्रेंडली मूर्तियों के जरिए गंगा में पारंपरिक विसर्जन की अनुमति हमेशा के लिए सुनिश्चित की जाए।

