Varanasi: मणिकर्णिका घाट पर हो रहे पुनर्निर्माण के तहत की जा रही बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो वायरल होते ही काशी की गलियों से लेकर इंदौर तक विरोध शुरू हो गया। रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों ने इस मामले को सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विपक्ष के आरोपों के बीच शुक्रवार को वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
Varanasi: AI से बना वीडियो, हकीकत से कोई संबंध नहीं
करीब दो घंटे तक मणिकर्णिका घाट और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद उन्होंने सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया। और बताया कि अहिल्याबाई की जो मूर्ति हटी है, वो मणि पर ड्रिलिंग के दौरान हुए वाइब्रेशन से हुई। इन मूर्तियों को संस्कृति विभाग (Varanasi) ने संरक्षित किया गया है। सभी मूर्तियों को दोबारा स्थापित कर दिया जाएगा। वहीं विधायक नीलकंठ तिवारी ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो AI से बनाए गए हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है।

ड्रिलिंग के दौरान हुए वाइब्रेशन के कारण हटी मूर्तियाँ
विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा “मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर किसी भी मंदिर या मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी जिस मूर्ति की बात की जा रही है, वह मणि क्षेत्र में ड्रिलिंग के दौरान हुए वाइब्रेशन के कारण हटी थी, न कि तोड़ी गई।”
उन्होंने बताया कि ड्रिलिंग के दौरान कुछ पुराने चबूतरों और संरचनाओं में कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से वहां रखी मूर्तियों को हटाकर संस्कृति विभाग के पास संरक्षित कर दिया गया है।
सभी मूर्तियाँ संस्कृति विभाग के पास संरक्षित
मेयर अशोक तिवारी ने भी विवाद पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा “चबूतरे और सीढ़ियों में लगी कलाकृतियों को विधिवत तरीके से संस्कृति विभाग को सौंप दिया गया है। वे सभी संरक्षित हैं।” मेयर ने बताया कि मणिकर्णिका घाट (Varanasi) के पुनर्निर्माण पर करीब 18 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य रूपा फाउंडेशन के CSR फंड से हो रहा है, यह कंपनी गुजरात की नहीं, बल्कि कोलकाता की है, ठेका कंपनी को जून 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
1771 मेंअहिल्याबाई होल्कर ने कराया था निर्माण
गौरतलब है कि मणिकर्णिका घाट (Varanasi) का निर्माण साल 1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था, जबकि 1791 में उन्होंने स्वयं इसका जीर्णोद्धार भी कराया। यही वजह है कि घाट से जुड़ा हर बदलाव भावनात्मक और ऐतिहासिक संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है। बुधवार को जब कुछ लोगों ने मलबे के बीच अहिल्याबाई की मूर्ति देखी, तो विरोध शुरू हो गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और फिर यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले बैठा।
अब सवाल यही है कि क्या यह विरोध सिर्फ गलतफहमी और वायरल वीडियो का नतीजा है, या फिर मणिकर्णिका घाट का यह नवीनीकरण आने वाले दिनों में विकास बनाम संस्कृति की बहस को और तेज करेगा? फिलहाल, मणिकर्णिका घाट पर चल रहा काम और उससे जुड़ा विवाद काशी की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।

