Varanasi: काशी का मणिकर्णिका घाट, जिसे महाश्मशान कहा जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने तीर्थ नगरी में हलचल मचा दी है। वीडियो में बुलडोजर चलते हुए दिखाई देता है और आवाज गूंजती है—“कॉरिडोर के विकास के नाम पर विनाश, देखिए कैसे मंदिरों को गिराया जा रहा है।” यह दृश्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच गहरी चिंता और बहस का कारण बन गया है।

सोशल मीडिया पर ‘पागल बाबा’ का दावा
यह वीडियो पुनीत कृष्ण जेटली, जिन्हें लोग ‘पागल बाबा’ के नाम से जानते हैं, के अकाउंट से पोस्ट किया गया है। पांच मिनट 11 सेकंड लंबे इस वीडियो में घाट पर बुलडोजर की गतिविधि दिखाई देती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि विकास परियोजना (Varanasi) के नाम पर मंदिरों को तोड़ा जा रहा है और पवित्र स्थलों को मिटाया जा रहा है। इस दावे ने विरोध की आवाज़ों को और तेज़ कर दिया है।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मणिकर्णिका घाट पर अत्याधुनिक शवदाह गृह (Varanasi) का निर्माण कार्य एक अलग एजेंसी कर रही है। उनका कहना है कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है, बल्कि घाट के सभी मंदिरों का सुंदरीकरण किया जाएगा। प्रशासन का तर्क है कि यह परियोजना घाट की सुविधाओं को आधुनिक बनाने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था करने के लिए है।

Varanasi: पुनर्विकास योजना की रूपरेखा
मणिकर्णिका घाट (Varanasi) के पुनर्विकास में कई आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया गया है। भूतल का कुल क्षेत्रफल 29,350 वर्ग फीट होगा, जिसमें पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र और सामुदायिक प्रतीक्षा कक्ष बनाए जाएंगे। दाह संस्कार क्षेत्र 12,250 वर्ग फीट का होगा, जबकि प्रथम तल का क्षेत्रफल 20,200 वर्ग फीट तय किया गया है। घाट पर 32 शव प्लेटफॉर्म और प्रदूषण रहित चिमनी की व्यवस्था होगी। इसके अलावा दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र और बड़े पैमाने पर पर्यटकों के लिए विजिटर मार्ग भी तैयार किया जाएगा।

इस परियोजना पर लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो कोलकाता के रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई, 2023 को इस पुनर्विकास (Varanasi) का शिलान्यास किया था। निर्माण में चुनार के बलुआ पत्थरों और जयपुर के गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि घाट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे।

