Varanasi: काशी के मणिकर्णिका घाट से जुड़ा विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। बजट सत्र के दौरान मंगलवार को संसद परिसर के बाहर और भीतर समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा सांसदों ने हाथों में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की तस्वीरें लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और काशी की सांस्कृतिक पहचान को बचाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में सपा सांसद रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव सहित कई सांसद शामिल रहे। सांसदों ने “राजमाता का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारों के साथ सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप था कि मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर की जा रही तोड़फोड़ से काशी की सदियों पुरानी परंपरा और पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
बनारस की ऐतिहासिक आत्मा को पहुंचाया ठेस
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर बिना किसी ठोस योजना के निर्माण और तोड़फोड़ की जा रही है, जिससे बनारस की ऐतिहासिक आत्मा को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि काशी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि उसकी गलियां, मंदिर और परंपराएं उसकी पहचान हैं, जिन्हें खत्म करने की कोशिश हो रही है।
Varanasi: काशी की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान
रामगोपाल यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह स्वयं वाराणसी (Varanasi) से सांसद हैं, इसके बावजूद काशी की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बनारस की जनता हमेशा से विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने की पक्षधर रही है, लेकिन मौजूदा कार्यों से शहर की मूल पहचान को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
सपा सांसदों ने मांग की कि मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर किसी भी तरह का कार्य स्थानीय परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखकर ही किया जाए, ताकि काशी की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।

