Varanasi: साइबर अपराध पर नकेल कसते हुए वाराणसी पुलिस ने दो फर्जी कॉल सेंटर्स का पर्दाफाश किया है। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कुल 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए सामान की कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई है।
डीसीपी (क्राइम) सरवणन टी. ने बताया कि साइबर सेल को एक महिला की शिकायत के सत्यापन के दौरान इस गिरोह की गतिविधियों का सुराग मिला। जानकारी पुख्ता होते ही सिगरा, चेतगंज और जनपदीय साइबर सेल की टीमों (Varanasi) ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। इस दौरान सिगरा इलाके से 26 और चेतगंज से 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
Varanasi: करीब 20 लाख का सामान हुआ जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 57 मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और नेपाल के कई दस्तावेज बरामद किए। पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए सभी सामान और दस्तावेजों की कुल कीमत लगभग 20 लाख रुपये है।
पुलिस जांच में सामने आया कि ये कॉल सेंटर मुख्य रूप से दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) और पश्चिम भारत (गुजरात, महाराष्ट्र) के लोगों को निशाना बनाते थे। आरोपियों ने डीमैट अकाउंट खोलने के बहाने लोगों से धोखाधड़ी की। हर कर्मचारी को एक नकली “वर्किंग नेम” दिया जाता था, जिसका इस्तेमाल वे क्लाइंट्स से बात करते समय करते थे, ताकि उनकी असली पहचान छिपी रहे।
इन दोनों कॉल सेंटर्स (Varanasi) का संबंध 27 एनसीआरपी पोर्टल शिकायतों से जुड़ा पाया गया है। अब तक की जांच में करीब 31 लाख 33 हजार रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस का मानना है कि रकम इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।
डीसीपी क्राइम ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध बीएस के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनके आपराधिक नेटवर्क और इतिहास की जांच पूरे देश में कराई जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे साइबर अपराध का शिकार होते हैं तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।