Varanasi: चौबेपुर थाना क्षेत्र के लूठा कला गांव की बेटी रंजन यादव ने अपने अदम्य साहस और अथक परिश्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है। एशियाई यूथ एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में हुए 5000 मीटर दौड़ मुकाबले में रंजन ने रजत पदक जीतकर देश, प्रदेश और क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। साधारण किसान परिवार से आने वाली रंजन, किसान राजकुमार यादव की पुत्री हैं। उनकी मां उर्मिला देवी का निधन पिछले वर्ष हो गया था। परिवार में पांच बहन-भाई हैं और रंजन सबसे छोटी हैं। उनके बड़े पापा भोला यादव और दादा दीना नाथ यादव का परिवार भी इस उपलब्धि से गदगद है।
Varanasi: कौन है रंजना यादव
रंजना यादव मात्र 16 वर्ष की हैं और वर्तमान में भोपाल में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई के साथ-साथ एथलेटिक्स की तैयारी कर रही हैं। उनकी खेल यात्रा की शुरुआत मात्र 12 साल की उम्र में हुई थी, जब उन्होंने वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कोच बृजभान यादव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।रंजन ने हाल ही में 13 अक्टूबर को ओडिशा में आयोजित प्रतियोगिता में 6000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था।
इसके बाद 23 अक्टूबर को सऊदी अरब में आयोजित एशियाई चैम्पियनशिप में 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किया। उनके पिता राजकुमार यादव (Varanasi) पिछले 35 वर्षों से गुजरात के मेहसाणा में दूध ट्रक ड्राइवर के रूप में काम करते हैं। बेटी की इस सफलता की खबर सुनते ही उन्होंने भावुक होकर कहा, मेरी बेटी ने हमारे सपनों को हकीकत में बदल दिया है। अब उसका अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल है।
वही गांव में रंजना (Varanasi) की इस उपलब्धि से खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाई बांटकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। लोगों ने कहा कि रंजन ने यह साबित कर दिया है कि गांव की बेटियां भी अगर ठान लें, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

