Varanasi: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा किए गए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वाराणसी की रैंकिंग में गिरावट आई है, जो पिछले साल 11वें स्थान से इस साल 13वें स्थान पर आ गई है। यह सर्वेक्षण शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार के आधार पर किया जाता है और इसके परिणामस्वरूप सूरत, जबलपुर और आगरा को क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिला है।
मंत्रालय की ओर से तीन कैटिगरी में सर्वे किया जाता है। पहला 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर, दूसरा तीन से 10 लाख की आबादी और तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों (Varanasi) का सर्वे कराया जाता है। इसमें यूपी के शहरों का प्रदर्शन अच्छा रहा। हांलाकि वाराणसी की रैंकिंग इस बार दो पायदान नीचे लुढ़क गई।
Varanasi: शहर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को दर्शाती है यह गिरावट
वाराणसी (Varanasi) की रैंकिंग में गिरावट शहर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को दर्शाती है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वायु प्रदूषण के कारण मौतें और श्वास रोग होते हैं। वायु प्रदूषण की पहचान ज्यादातर प्रमुख स्थायी स्रोतों से की जाती है, पर उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत मोबाइल, ऑटोमोबाइल्स है। कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए सहायक है, को हाल ही में प्राप्त मान्यता के रूप में मौसम वैज्ञानिक प्रदूषक के रूप में जानते हैं।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 200 नंबर के आधार पर रैंकिंग घोषित की गई। वाराणसी नगर निगम ने 200 अंक के कार्य में से 192 अंक के कार्य किए। जांच के बाद वाराणसी को कुल 176.5 अंक मिले। 23.5 अंक से वाराणसी चूक गया। वाराणसी (Varanasi) नगर निगम के अनुसार 23.5 नंबर कम मिलने की कई वजहें हैं। इसके लिए नगर निगम के साथ बिजली विभाग और आरटीओ भी जिम्मेदार है।
नगर निगम के कूड़ा निस्तारण में शत-प्रतिशत सफलता नहीं मिलने की मुख्य वजह है। ज्यादा पॉवर कट होने की वजह से जनरेटर का इस्तेमाल ज्यादा किया गया। इसके धुआं से वायु गुणवत्ता पर असर पड़ा। इसके साथ ही शहर में वाहनों से निकले वाले धुएं की वजह से वायु गुणवत्ता प्रभावित हुई।