Varanasi: ज्ञानवापी परिसर में एक बार फिर धार्मिक आस्था का दृश्य देखने को मिला, जब अखिल भारतीय संत समिति की ओर से मां श्रृंगार गौरी का विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया। इस अवसर पर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए संत समिति के सदस्यों ने मां श्रृंगार गौरी के विग्रह के बाहर पूजा-पाठ किया। विशेष अनुष्ठान का नेतृत्व अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने किया।

पूजन कार्यक्रम के अंतर्गत ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार पर स्थित मां श्रृंगार गौरी के विग्रह का पूजन किया गया, साथ ही नंदी महाराज की पूजा और बाबा विश्वनाथ (Varanasi) का जलाभिषेक भी संपन्न हुआ। संतों ने प्राचीन पत्थरों पर कुमकुम, सिंदूर और चंदन अर्पित कर कपूर से मां की आरती उतारी। इसके बाद राम कथा आयोजन की औपचारिक शुरुआत की गई।

Varanasi: 67 वर्षों से नियमित रूप से होता आ रहा अनुष्ठान
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि मां श्रृंगार गौरी का दर्शन-पूजन वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसका उल्लेख सरकारी रिकॉर्ड में भी मिलता है। उनके अनुसार, यह अनुष्ठान पिछले कम से कम 67 वर्षों से नियमित रूप से होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि माघ माह में ज्ञानवापी परिसर (Varanasi) में राम कथा का आयोजन होता है, जिसकी शुरुआत मां श्रृंगार गौरी, प्रतिष्ठा रत्नदी और बाबा विश्वनाथ के पूजन के साथ की जाती है।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए बताया कि जब औरंगजेब के समय ज्ञानवापी को तोड़े जाने की घटना हुई थी, तब काशी (Varanasi) के संतों और कथा व्यास ने राम कथा के माध्यम से उस विध्वंस के कलंक को मिटाने का संकल्प लिया था। उसी परंपरा के तहत यह धार्मिक अनुष्ठान सैकड़ों वर्षों से चलता आ रहा है।

नियमित दर्शन की अनुमति की उठी मांग
उल्लेखनीय है कि ज्ञानवापी परिसर के पश्चिमी हिस्से में सिंदूर लगा स्थान मां श्रृंगार गौरी के मंदिर के रूप में पूजा जाता है, जिसे लेकर हिंदू पक्ष और अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी के बीच न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। यह मामला वाराणसी (Varanasi) की कुछ महिलाओं द्वारा दायर किया गया था, जिसमें नियमित दर्शन की अनुमति की मांग की गई थी। वर्तमान में यहां केवल विशेष पर्वों पर सीमित संख्या में दर्शन-पूजन की अनुमति दी जाती है।

श्रृंगार गौरी प्रकरण (Varanasi) की सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी परिसर में कमीशन कार्रवाई और पुरातात्विक सर्वेक्षण भी किया जा चुका है। इस दौरान कई साक्ष्य सामने आने का दावा किया गया, वहीं वजूखाने में शिवलिंग नुमा आकृति मिलने का मामला भी अलग से न्यायालय में विचाराधीन है।

