Varanasi: गंगा, जिसे भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा दिया गया है, एक बार फिर प्रदूषण की बहस के केंद्र में है। वाराणसी में संचालित विवेकानंद क्रूज पर आरोप है कि उसने सीधे गंगा में मल-मूत्र गिराया। नाविकों द्वारा बनाए गए वीडियो ने सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलकर प्रशासन और राजनीति दोनों को हिला दिया। यूपी कांग्रेस ने इस मुद्दे को सरकार की लापरवाही से जोड़ते हुए तीखे सवाल उठाए हैं।
नगर निगम की तात्कालिक कार्रवाई
वीडियो सामने आते ही वाराणसी नगर निगम हरकत में आया। निगम (Varanasi) ने एक विशेष जांच समिति गठित की है, जो क्रूज के अपशिष्ट निस्तारण सिस्टम और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की पड़ताल करेगी। समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
Varanasi: नाविकों का आक्रोश
स्थानीय नाविकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों को लेकर चिंतित थे। मांझी समाज के अजित साहनी उर्फ छोटू ने आरोप लगाया कि बड़े क्रूजों (Varanasi) के संचालन में नियमों की अनदेखी होती है, जबकि छोटे नाविकों पर प्रशासन सख्ती करता है। नाविकों ने इसे गंगा की आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जिलाधिकारी की सख्त चेतावनी
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार (Varanasi) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गंगा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं होगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो क्रूज संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
विवेकानंद क्रूज के संचालक ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि गंगा में छोड़ा गया पानी सामान्य था, न कि मल-मूत्र। उन्होंने दावा किया कि क्रूज (Varanasi) में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम मौजूद है और सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाता है।

