Varanasi: शहर के घाटों पर उमड़ी भीड़, नववर्ष की रौनक और पर्यटकों का उत्साह—इन सबके बीच अस्सी घाट पर घटित एक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। यह कहानी किसी पुलिस ऑपरेशन की नहीं, बल्कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवती के साहस और तकनीकी दक्षता की है, जिसने अकेले दम पर मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
Varanasi: आईफोन चोरी और लापरवाह सुरक्षा
मुंबई निवासी अंकिता गुप्ता, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, बनारस भ्रमण पर आई थीं। सोमवार की शाम अस्सी घाट (Varanasi) की भीड़ में उनका करीब दो लाख रुपये का आईफोन एक उचक्का छीनकर फरार हो गया। यह वही समय था जब घाटों पर पर्यटकों की भीड़ चरम पर थी और सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर दर्ज दिखाई दे रही थी।
घटना के बाद अंकिता ने भेलूपुर थाने को सूचना दी। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन जांच की रफ्तार वहीं थम गई। पीड़िता (Varanasi) ने मोबाइल का बिल और ईएमआई नंबर तक उपलब्ध कराया, फिर भी न लोकेशन ट्रेस हुई, न तलाशी अभियान चला। यह स्थिति प्रदेश सरकार के उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें पुलिस को अत्याधुनिक तकनीक से लैस बताया जाता है।
जब पीड़िता बनी खोजी
पुलिस की उदासीनता से निराश होकर अंकिता ने खुद मोर्चा संभाला। तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की और रात दो बजे तक उसी जगह पर डटी रहीं। पत्रकार सुरेश गांधी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन केवल औपचारिकता निभाकर लौट गई।
मंगलवार सुबह अंकिता फिर उसी जगह पहुंचीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि संदिग्ध युवक चांदपुर चौराहा स्थित मकान में किराए पर रहता है। जब मकान मालिक (Varanasi) ने ताला खुलवाया, तो आरोपी फरार था, लेकिन कमरे में 15 से 20 महंगे मोबाइल फोन पड़े मिले। अंकिता ने वहीं अपने आईफोन की पहचान कर ली।
पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए गए हैं और फरार आरोपी की तलाश जारी है। बरामद मोबाइलों के आधार पर अन्य पीड़ितों की पहचान भी की जाएगी।

