Kashi: उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शुक्रवार को तीन दिवसीय महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का जीवंत मंचन किया गया। यह कार्यक्रम बीएलडब्ल्यू (Kashi) स्थित सूर्य सरोवर मैदान में हुआ। यह भव्य आयोजन 3 अप्रैल से 5 अप्रैल तक संचालित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में हुई। वहीं मुख्यमंत्री मोहन ने 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी योगी आदित्यनाथ को भेंट किया। जिसे शनिवार को श्री बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया जायेगा। उद्घाटन समारोह में उपस्थित जनसमूह, भव्य मंच सज्जा, और जीवंत ऐतिहासिक प्रस्तुतियों ने वाराणसी को मानो प्राचीन काल के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से आयोजित (Kashi) इस महानाट्य की परिकल्पना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा की गयी। पद्मश्री डॉ। भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 225 से ज्यादा कलाकारों समेत हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियों ने दर्शकों (Kashi) को हर्सोल्लास से भर दिया।

सम्राट विक्रमादित्य न्याय, धर्म के प्रतिक
उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन उस विरासत को जीवित रखने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा सम्राट विक्रमादित्य केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सके।

वहीं मुख्यमंत्री योगी ने पीएम के एक भारत श्रेष्ठ भारत को आगे बढ़ाते हुए सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस नाट्य कार्यक्रम की शैव परम्परा की काशी में होना प्रासंगिक है। इस नाट्य की प्रस्तुति मात्र एक नाट्य कार्यक्रम नहीं बल्कि अपने मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।

इसके साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य का नाम न्याय और पराक्रम का पर्याय है। उनके जीवन पर आधारित यह मंचन (Kashi) न केवल मनोरंजक है, बल्कि शिक्षाप्रद भी है। उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और आयोजकों की सराहना की।

Kashi: तीन विशाल मंचों पर हुई प्रस्तुति
आयोजन स्थल (Kashi) पर एक साथ तीन विशाल मंच तैयार किए गए, जिन पर समांतर रूप से विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए। इन तीन मंचों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के बाल्यकाल, वीरता और युद्ध कौशल, न्यायप्रियता, प्रजा के प्रति करुणा और समर्पण तथा विद्वानों और कला के प्रति सम्मान आदि विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। इस कार्यक्रम की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक था मंचन में वास्तविक हाथी और घोड़ों का उपयोग। हर मंच पर दृश्य परिवर्तन, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभाव इतने सटीक थे कि दर्शकों की नजरें एक पल के लिए भी मंच से नहीं हटीं।

बालिकाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन
विशेष रूप से सम्राट विक्रमादित्य की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने अपनी दमदार उपस्थिति और प्रभावशाली संवादों से दर्शकों (Kashi) को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके चेहरे के भाव, शौर्यपूर्ण चाल और न्याय करते समय की गंभीरता ने दर्शकों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ा। बालिकाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम स्थल (Kashi ) पर हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। परिवारों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण थीं कि यह आयोजन उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। कई दर्शकों ने कहा कि उन्होंने ऐसा भव्य और जीवंत मंचन पहले कभी नहीं देखा।
निश्चित रूप से यह आयोजन (Kashi) केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देता है। आज के आधुनिक युग में, जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

