मैं जिंदा हूं, मुझे कहां लेकर जा रहे हो…..यूपी के Agra का एक ऐसा मामला जिसकी सच्चाई जानकार आप दंग रह जाएंगे। इस मामले ने डॉक्टरों से लेकर आम लोगों तक को हैरानी में डाल दिया। आगरा की 65 वर्षीय एक महिला, जो मौत के 17 घंटे बाद जाग उठी और कहा कि ‘मैं जिन्दा हूं’। इस महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था और वह उस समय अचानक जीवित हो उठीं जब घर में उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। महिला ने अचानक अपने दामाद का हाथ पकड़कर कहा, “मैं जिंदा हूं… मुझे कहां लेकर जा रहे हो?” यह सुनते ही पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।
मिली जानकारी के अनुसार, आगरा (Agra) के ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र की श्रीनगर कॉलोनी की रहने वाली 65 वर्षीय शीला देवी काफी लंबे समय से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके पति हरिओम माहौर का पहले ही निधन हो चुका है और वह अपने बेटे सुनील माहौर के परिवार के साथ रहती थीं।
करीब 20 दिन पहले इलाज के लिए वह अपने दूसरे बेटे संजीव माहौर के पास बदायूं गई थीं। संजीव एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। वहां से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मंगलवार को हालत नाजुक होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा।
डॉक्टरों ने तड़के किया मृत घोषित
बुधवार को अस्पताल के डॉक्टरों ने शीला देवी को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन एंबुलेंस (Agra) से उनका शव लेकर आगरा स्थित घर पहुंचे। घर में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। फूल-मालाएं और अन्य आवश्यक सामग्री भी मंगवा ली गई थी।
अंतिम प्रणाम करते ही हुआ घटनाक्रम
इस दौरान जब देर शाम शीला देवी के दामाद अंतिम प्रणाम करने पहुंचे और उनके पैर छुए, तभी अचानक उनके शरीर में हलचल महसूस हुई। कुछ ही क्षण बाद उन्होंने दामाद का हाथ पकड़ लिया और कहा, “मैं जिंदा हूं… मुझे कहां लेकर जा रहे हो? तुम सब रो क्यों रहे हो?”
महिला की आवाज सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। पहले तो किसी को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने दोबारा प्रतिक्रिया दी तो परिवार ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत आगरा के एक निजी अस्पताल पहुंचाया।
Agra: अस्पताल में जारी है उपचार
फिलहाल शीला देवी का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति (Agra) पर लगातार नजर रखे हुए हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के बाद इस तरह जीवन के संकेत वापस आने की वजह क्या रही।
पड़ोसी ने सुनाई पूरी घटना
पड़ोसी धर्मपाल के मुताबिक, एंबुलेंस (Agra) से शव घर लाने के बाद उसे एक कमरे में रखा गया था। इसी दौरान उनकी बेटी और दामाद पहुंचे। जैसे ही दामाद ने उनके चरण स्पर्श किए, महिला के शरीर में हलचल शुरू हो गई और उनकी सांसें लौट आईं। इसके बाद पूरे परिवार में खुशी और हैरानी का माहौल बन गया।
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इस घटना ने मृत घोषित किए जाने की चिकित्सकीय प्रक्रिया (Agra) पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिस महिला को अस्पताल में मृत घोषित किया गया, उसमें करीब 17 घंटे बाद जीवन के संकेत कैसे लौट आए? फिलहाल इस सवाल का जवाब चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञों की राय के बाद ही सामने आ सकेगा।
