Varanasi में गंगा का रौद्र रूप अब तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है। नदी का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है और कई पक्के घाटों की सीढ़ियों को पार कर पानी गलियों और सड़कों की ओर बढ़ने लगा है। दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट और सामनेघाट तक बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। कहीं जल पुलिस चौकी पानी में डूब गई है तो कहीं घाटों पर रोजी-रोटी चलाने वाली दुकानें बंद हो गई हैं।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 3 सितंबर की सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 70.56 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से करीब 29.8 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी का जलस्तर करीब 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। सुबह 8 बजे तक वाराणसी (Varanasi) में 28.2 मिलीमीटर बारिश भी रिकॉर्ड की गई।

हालांकि गंगा का वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान 71.262 मीटर से करीब 70 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन पानी बढ़ने की रफ्तार ने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दशाश्वमेध घाट पर सीढ़ियां पार कर सड़क की ओर बढ़ा पानी
दशाश्वमेध घाट (Varanasi) पर गंगा का पानी सीढ़ियों को पीछे छोड़कर सड़क की तरफ बढ़ रहा है। घाट क्षेत्र में स्थित जल पुलिस चौकी भी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। पानी अब आसपास के निचले हिस्सों की ओर बढ़ रहा है।

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की ओर जाने वाली गलियों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी बढ़ने से घाटों (Varanasi) के बीच आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है। यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में अस्सी घाट की ओर जाने वाली सड़कों पर भी पानी पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
नौका संचालन बंद, नाविकों की रोजी-रोटी पर संकट
गंगा के बढ़ते जलस्तर और सुरक्षा को देखते हुए नौका संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके चलते नाविकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

नाविकों का कहना है कि गंगा का पानी बढ़ने के कारण नाव चलाने पर रोक है और अब उन्हें नदी का पानी घटने का इंतजार करना पड़ रहा है। काशी (Varanasi) के घाटों पर बड़ी संख्या में नाविकों की आजीविका नौका संचालन पर निर्भर है।
घाट किनारे की दुकानें बंद, रोज कमाने-खाने वालों पर दोहरी मार
गंगा किनारे घाटों (Varanasi) पर फूल-माला, पूजा सामग्री, चाय-नाश्ता समेत कई छोटी दुकानें रोजाना लोगों की आजीविका का साधन हैं। कई घाटों पर दर्जनों दुकानें लगती हैं। हालांकि नगर निगम समय-समय पर इन दुकानों को हटाता है, लेकिन इनसे जुड़े लोगों के लिए यही रोजमर्रा की कमाई का जरिया हैं।

गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद घाट क्षेत्र में पानी पहुंचने लगा तो कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। ऐसे में एक तरफ बाढ़ का खतरा है और दूसरी तरफ कारोबार बंद होने से रोज कमाने वाले परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच डूबा
गंगा का पानी अस्सी घाट क्षेत्र (Varanasi) में भी लगातार ऊपर बढ़ रहा है। ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच करीब पांच फीट पानी में डूब गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर लोगों का प्रवेश रोक दिया है।

पुराने अस्सी घाट की तरफ भी पानी सड़क की ओर बढ़ रहा है। अस्सी घाट, रविदास घाट और तुलसी घाट पर स्नान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बाहर से आए कई श्रद्धालु सामनेघाट (Varanasi) के नए पक्के घाट की ओर जाते नजर आ रहे हैं।
नगवा में भी बढ़ी चिंता, दर्जनों परिवारों पर विस्थापन का खतरा
नगवा नाले के आसपास पानी लगातार बढ़ रहा है। नगवा रामेश्वर मठ के पीछे जाने वाले रास्ते तक पानी पहुंचने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो नगवा सोनकर बस्ती और हरिजन बस्ती (Varanasi) के करीब दर्जनभर परिवारों को राहत शिविरों में भेजने की नौबत आ सकती है।

गंगोत्री बिहार कॉलोनी की लेन नंबर एक के नीचे तक गंगा का पानी पहुंच गया है। सामनेघाट में अघोर आश्रम के आसपास के निचले हिस्सों में भी पानी भर गया है। सामनेघाट तिराहे से पीएसी कैंप की तरफ जाने वाले मार्ग पर पानी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

सामनेघाट जज गेस्ट हाउस और नए पक्के घाट (Varanasi) के सामने बनी बारादरी पूरी तरह पानी में डूब गई है। वहीं गढ़वाघाट आश्रम के सामने पक्के घाट की मढ़ी भी जलमग्न हो चुकी है।
ज्ञान प्रवाह नाले का चैनल गेट बंद, पंप से निकाला जा रहा पानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ज्ञान प्रवाह नाला भी पानी से भर गया है। पानी को कॉलोनियों की तरफ जाने से रोकने के लिए चैनल गेट बंद कर दिया गया है। कॉलोनियों (Varanasi) की ओर जमा हो रहे पानी को मोटर पंप के जरिए बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वरुणा का पानी घरों तक पहुंचा, राहत शिविरों में बढ़ रहे प्रभावित
गंगा के साथ वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर भी परेशानी का कारण बना हुआ है। हिदायत नगर और तालीमन नगर में कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है। नक्खीघाट और दीनदयालपुर में बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की संख्या बढ़ रही है।

वरुणा की बाढ़ का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। बेदौली, कोटवा और टड़िया के नदी किनारे वाले इलाकों में किसानों की फसल पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
रमना में सब्जियों की फसल में घुसा पानी
रमना गांव में गंगा किनारे किसानों द्वारा तैयार की गई सब्जियों की फसल में भी पानी पहुंचने लगा है। किसानों को आशंका है कि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो खेत पूरी तरह जलमग्न हो सकते हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अस्सी से सामनेघाट और डोमरी तक बढ़ रहा पानी
गंगा का बढ़ता पानी अब अस्सी से सामनेघाट और डोमरी (Varanasi) तक निचले इलाकों और आबादी की ओर बढ़ रहा है। घाटों पर पानी चढ़ने के साथ आसपास की गलियों, रास्तों और निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

लगातार बारिश, पिछले 24 घंटे में 28 सेंटीमीटर की वृद्धि और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों (Varanasi) की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ रही है।

फिलहाल गंगा और वरुणा के जलस्तर (Varanasi) पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी का पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसने काशी के घाटों से लेकर तटवर्ती बस्तियों तक रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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