काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में दिव्यांग विद्यार्थियों के छात्रावास आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दिव्यांग विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर वर्ष 2014 में पारित नियमावली का पिछले चार-पांच वर्षों से लगातार पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। विद्यार्थियों का कहना है कि नियमावली के अनुसार पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाना अनिवार्य है, लेकिन प्रवेश मिलने के बाद भी उन्हें छात्रावास के लिए लगातार भटकना पड़ रहा है।

दिव्यांग विद्यार्थियों के अनुसार वर्ष 2014 में पारित नियमावली में 40 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तथा 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले अन्य विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटन का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों से इस व्यवस्था का प्रभावी रूप से अनुपालन नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों (BHU) का आरोप है कि इससे विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को पढ़ाई के साथ रहने की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
खाली कमरों के बावजूद आवंटन नहीं करने का आरोप
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन (BHU) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न छात्रावासों में कमरे खाली पड़े हैं। इन कमरों को प्रशासन द्वारा अतिथि शुल्क पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन छात्रावास के लिए पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को उन्हीं कमरों का आधिकारिक आवंटन नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय में कमरे उपलब्ध हैं तो नियमावली के तहत पात्र विद्यार्थियों को उनका लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है।

दिव्यांग विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रावास उनके लिए केवल रहने की सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा जारी रखने के लिए आवश्यक आधारभूत आवश्यकता है। विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों (BHU) को बाहर रहकर पढ़ाई करने में आने वाली परेशानियां सामान्य विद्यार्थियों की तुलना में अधिक होती हैं। ऐसे में नियमावली में किए गए प्रावधानों का पालन नहीं होने से उन्हें आर्थिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कई वर्षों से पत्राचार, फिर भी समाधान नहीं
विद्यार्थियों (BHU) के अनुसार इस समस्या को लेकर पिछले चार-पांच वर्षों में कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों को पत्राचार किया गया। विद्यार्थियों ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण से लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति तक अपनी समस्या पहुंचाई। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। लगातार पत्राचार के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

इसी क्रम में दिव्यांग विद्यार्थियों ने 8 सितंबर को संयुक्त कुलसचिव एवं दिव्यांगता प्रकोष्ठ प्रमुख को प्रार्थना-पत्र सौंपा। विद्यार्थियों ने प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन देने की मांग की है।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
विद्यार्थियों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि वर्ष 2014 की नियमावली के अनुपालन के लिए लिखित रूप से स्पष्ट तिथि निर्धारित की जाए, ताकि पात्र विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटन सुनिश्चित हो सके। दूसरी मांग है कि जिन दिव्यांग विद्यार्थियों (BHU) को अब तक छात्रावास नहीं मिला है, उन्हें उपलब्ध खाली कमरों में रहने की अनुमति दी जाए। तीसरी मांग नए विद्यार्थियों से लिए जा रहे अतिथि शुल्क को वापस करने की है।
विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन देता है और कार्रवाई के लिए समय निर्धारित करता है तो वे प्रशासन द्वारा दिए गए समय तक अपना धरना स्थगित कर देंगे।
BHU सेंट्रल ऑफिस पर हुए धरनारत
मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में दिव्यांग विद्यार्थियों ने 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। विद्यार्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान लंबे समय से लंबित छात्रावास (BHU) आवंटन की समस्या की ओर आकर्षित करना है।
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दिव्यांग विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन (BHU) से मांग की है कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने से पहले नियमावली के अनुरूप छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए और पात्र विद्यार्थियों को तत्काल राहत दी जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि कई वर्षों से चली आ रही समस्या का अब स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रवेश के बाद रहने के लिए भटकना न पड़े।
