Varanasi: काशी के प्रमुख घाटों पर आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और आम लोगों के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। विशेष रूप से मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराने आने वाले लोगों के साथ दुर्व्यवहार की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस घाट पर सक्रिय रहने वाले लोगों की गतिविधियों और उनके पुराने मामलों की जानकारी जुटाने में लगी है। इसके साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल रहने वाले लोगों, नाविकों और दुकानदारों की सूची तैयार करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि घाट पर आने वाले लोगों के साथ बदसलूकी करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
पुलिस के अनुसार, मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर अंतिम संस्कार कराने आने वाले लोगों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। लगभग हर चौथे दिन इस तरह की शिकायत चौकी या थाने तक पहुंचती है। हालांकि, कई मामलों में शिकायत करने वाले लोग कार्रवाई नहीं चाहते और अपनी शिकायत दर्ज कराए बिना ही लौट जाते हैं। इससे ऐसे मामलों में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन शिकायतों में पर्यटकों की संख्या भी कम नहीं है। अब पुलिस ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए घाट पर सक्रिय लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने की दिशा में काम कर रही है।
घाट पर सक्रिय लोगों का तैयार होगा ब्योरा
मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर अंतिम संस्कार कराने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। कई परिवार अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कराने के लिए पहली बार काशी आते हैं। ऐसे में घाट की व्यवस्था और वहां मौजूद लोगों के व्यवहार का उनके अनुभव पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील परिस्थिति में यदि किसी के साथ दुर्व्यवहार या अभद्रता होती है, तो परिजनों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी को देखते हुए (Varanasi) पुलिस घाट पर सक्रिय रहने वाले लोगों का ब्योरा जुटाने की तैयारी कर रही है। इसमें नाविकों, दुकानदारों और अंतिम संस्कार से संबंधित गतिविधियों में शामिल लोगों की सूची तैयार करने की योजना है। साथ ही, पुराने मामलों और शिकायतों के आधार पर भी जानकारी एकत्र की जाएगी। इसका उद्देश्य घाट पर आने वाले लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है।पुलिस का मानना है कि घाटों पर सक्रिय लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध होने से शिकायत मिलने पर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे पर्यटकों और (Varanasi) आम लोगों के साथ होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में भी मदद मिलेगी।
Varanasi: हरिश्चंद्र घाट पर भी बढ़ेगी निगरानी
पुलिस की सख्ती केवल मणिकर्णिका घाट (Varanasi) तक सीमित नहीं रहेगी। शहर के दूसरे प्रमुख श्मशान घाट हरिश्चंद्र घाट पर भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। यहां भी अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार न हो, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके अलावा अस्सी घाट, नमो घाट (Varanasi) और दशाश्वमेध घाट पर पर्यटकों तथा आम लोगों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इन घाटों पर स्थानीय लोगों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भीड़ रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से काशी की छवि प्रभावित होने की आशंका रहती है।पुलिस के सामने चुनौती यह है कि घाटों पर आने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही ऐसी घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जाए, जिनमें विवाद के बाद मारपीट या दुर्व्यवहार की स्थिति पैदा होती है।
अस्सी घाट पर एक साल में मारपीट की करीब 210 घटनाएं
अस्सी घाट (Varanasi) पर पर्यटकों और आम लोगों के साथ मारपीट की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यहां एक साल के दौरान मारपीट की करीब 210 घटनाएं हुईं, लेकिन इनमें से केवल 10 मामलों में ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई। यह आंकड़ा शिकायतों और दर्ज मामलों के बीच अंतर को भी दर्शाता है।
कई बार विवाद होने के बाद पीड़ित पक्ष पुलिस तक पहुंचता है, लेकिन बाद में कार्रवाई की इच्छा नहीं जताता। ऐसे में (Varanasi) घटना की शिकायत मिलने के बावजूद मामला औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हो पाता। यदि शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो और घाटों पर निगरानी मजबूत की जाए, तो ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।अस्सी घाट (Varanasi) पर स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की भी बड़ी संख्या पहुंचती है। घाट के आसपास की गतिविधियों और लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना जरूरी है। मारपीट की घटनाओं को लेकर पुलिस की निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
चौक और दशाश्वमेध में 20 मामलों में प्राथमिकी
घाटों और आसपास के क्षेत्रों में मारपीट तथा दुर्व्यवहार की घटनाओं को लेकर चौक और दशाश्वमेध क्षेत्र (Varanasi) में भी मामले सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में 20 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं, नमो घाट पर भी मारपीट की घटनाओं को लेकर हर महीने प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आती है।
मणिकर्णिका और दशाश्वमेध घाट पर पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी आए दिन मिलती रहती हैं। इन घटनाओं के कारण घाटों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।काशी (Varanasi) के घाट धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु शहर की व्यवस्था तथा स्थानीय लोगों के व्यवहार के आधार पर भी अपना अनुभव तय करते हैं। ऐसे में घाटों पर मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं को रोकना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

शिकायतों पर कार्रवाई से ही लगेगी अंकुश
मणिकर्णिका घाट (Varanasi) पर हर चौथे दिन दुर्व्यवहार की शिकायत पहुंचने और कई मामलों में पीड़ितों के बिना कार्रवाई कराए लौट जाने की जानकारी पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती है। नाविकों, दुकानदारों और घाट पर सक्रिय अन्य लोगों की सूची तैयार करने की योजना से संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब शिकायतों की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही अस्सी, नमो, दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट (Varanasi) पर निगरानी बढ़ाने तथा शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। इससे न केवल स्थानीय लोगों और पर्यटकों को राहत मिलेगी, बल्कि काशी के प्रमुख घाटों पर सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाने में भी मदद मिल सकती है।
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फिलहाल, पुलिस की योजना घाटों पर सक्रिय लोगों का ब्योरा जुटाने और दुर्व्यवहार की घटनाओं पर अंकुश लगाने की है। अब इस पहल के धरातल पर उतरने और शिकायतों के आधार पर प्रभावी कार्रवाई होने का इंतजार है।

