वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम की प्रथम वर्षगांठ पर नमामि गंगे ने मंगलवार को गंगाद्वार से काशी विश्वनाथ और मां गंगा की आरती उतारकर राष्ट्र के लिए समृद्धि की कामना की। नव्य गंगाद्वार से बाबा विश्वनाथ को शीश नवाया। गंगा निर्मलीकरण और पर्यावरण संरक्षण हेतु बाबा से आशीर्वाद मांगा। सनातनी संस्कृति के दिव्य अवसर पर नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि काशी देव भूमि है। मोक्ष स्थली काशी समर्पण, संस्कार व संस्कृति का मर्म समाहित किए हुए है। काशी ही नहीं बल्कि विश्व में साधना का केंद्र बाबा विश्वनाथ हैं।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख बाबा विश्वनाथ अनादिकाल से काशी में गंगा तट पर विराजमान हैं। भव्य नव्य दिव्य काशी विश्वनाथ धाम आज सांस्कृतिक दिव्यता के साथ आकर्षित व मंत्रमुग्ध कर रहा है। बाबा का अलौकिक दरबार तन – मन प्रफुल्लित कर रहा है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार पृथ्वी और स्वर्ग के बीच काशी को बड़े तीर्थ के रूप में माना गया है। जनसामान्य के साथ देवी-देवता, महापुरुष भी इस पवित्र धरा पर भक्ति भाव से ओतप्रोत होकर आते रहे हैं।

श्री काशी विश्वनाथ धाम से आज बनारस की आर्थिक तस्वीर बदल गई है। काशी विश्वनाथ धाम ने सनातन धर्मावलंबियों को एक सूत्र में बांधने का भी कार्य किया है। आज हम हमारी काशी के सांसद देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में कह सकते हैं….. आओ देखो घूमो हमरी काशी।
आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, बीना गुप्ता, सारिका गुप्ता, पुष्पलता वर्मा, विकास तिवारी, सुनिता देवी, सुनिता जायसवाल, सुषमा जायसवाल, पूजा मौर्या, सरस्वती मिश्रा, नगीना पांडेय, गीता सचदेवा आदि उपस्थित रहे।
