नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ नई FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 3 अक्टूबर को ईडी की शिकायत के आधार पर हुई, जिसमें गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
FIR में क्या दर्ज है, कौन हैं आरोपी?
इस ताज़ा FIR में कांग्रेस से जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को कथित रूप से Young Indian कंपनी के हाथों में देने की साजिश का आरोप है। आरोपी सूची में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा समेत छह लोग और तीन कंपनियां शामिल हैं। कंपनियों में AJL, Young Indian और कोलकाता स्थित Dotex Merchandise Pvt Ltd का नाम है। आरोप है कि Dotex ने Young Indian को 1 करोड़ रुपये दिए, जिससे Young Indian ने कांग्रेस को 50 लाख रुपये देकर AJL पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण हासिल कर लिया। जबकि AJL की संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 2,000 करोड़ रुपये बताया जाता है।
अदालत में बार–बार टलता फैसला
राउज एवेन्यू कोर्ट में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है। 14 जुलाई, 29 जुलाई, 8 अगस्त और 29 नवंबर को फैसला टल चुका है। अब सुनवाई का अगला पड़ाव 16 दिसंबर है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। चार्जशीट में PMLA कानून के तहत सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे सहित कई नेताओं के नाम दर्ज हैं।
ईडी की बड़ी कार्रवाई
ईडी ने इस FIR केस में लगातार दबाव बनाए रखा है। अप्रैल 2025 में AJL की 661 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कब्जे में लेने का नोटिस जारी किया गया। नवंबर 2023 में AJL के 90.2 करोड़ रुपये के शेयर कुर्क किए गए। मुंबई के बांद्रा स्थित हेराल्ड हाउस की ऊपरी मंज़िलों से मिलने वाले किराये को भी ईडी ने अपने पक्ष में जमा करने का आदेश दिया।
लंबी पूछताछ और पुराने आरोप
जून 2022 में राहुल गांधी से 50 घंटे तक पूछताछ हुई थी। जुलाई 2022 में सोनिया गांधी से तीन दिनों में कुल 12 घंटे सवाल पूछे गए। ईडी के अनुसार उनसे 100 से अधिक सवाल पूछे गए थे। यह विवाद 2012 में शुरू हुआ था, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका आरोप था कि घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार को Young Indian कंपनी के जरिए अवैध रूप से हड़पा गया। स्वामी का दावा था कि AJL पर कांग्रेस का 90 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे Young Indian ने अपने नाम लेकर मात्र 50 लाख रुपये में AJL का मालिकाना हक हासिल कर लिया।
नई FIR और अदालत में टलते फैसलों ने इस केस को फिर से राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। एजेंसियां इसे वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला मान रही हैं। अब सबकी निगाहें 16 दिसंबर पर हैं, जब अदालत का फैसला इस लंबे विवाद की दिशा तय कर सकता है।

